नयी दिल्ली, 13 अक्टूबर (भाषा) तांबा उद्योग के संगठन आईपीसीपीए ने सरकार से वित्त वर्ष 2027-28 के बजट में परिष्कृत तांबे और तांबे के कई उत्पादों पर मौजूदा आयात शुल्क को यथावत रखने का आग्रह किया है। संगठन ने चेतावनी दी है कि शुल्क में कोई भी कटौती आयात बढ़ा सकती है और घरेलू निवेश को जोखिम में डाल सकती है।
यह मांग ऐसे समय की गई है, जब तांबे का आयात बढ़ रहा है और घरेलू उत्पादन क्षमता का पूरा इस्तेमाल नहीं हो पाने को लेकर चिंताएं हैं।
भारतीय प्राथमिक तांबा उत्पादक संघ (आईपीसीपीए) ने सौर मॉड्यूल बनाने में इस्तेमाल होने वाली सौर पीवी रिबन और बस बार पर आयात शुल्क पांच प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत करने की भी मांग की है। उसका कहना है कि इससे घरेलू विनिर्माताओं को मदद मिलेगी और खासकर चीन से आयात पर निर्भरता कम होगी।
खान मंत्रालय को बजट-पूर्व दिए गए अपने सुझावों में आईपीसीपीए ने कहा कि वित्त वर्ष 2027-28 के केंद्रीय बजट में परिष्कृत तांबे (एचएस 7403) और तांबे के अर्ध-निर्मित उत्पादों (एचएस 7407, 7408, 7410) पर मौजूदा पांच प्रतिशत मूल सीमा शुल्क (बीसीडी) तथा तांबे की ट्यूब और पाइप (एचएस 7411) पर 7.5 प्रतिशत शुल्क को बिना किसी कटौती, छूट या नए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के तहत रियायत के बरकरार रखा जाना चाहिए। इसके साथ ही सौर पीवी रिबन और बस बार (एचएस 7409 और एचएस 7408 की कुछ श्रेणियों) पर मूल सीमा शुल्क पांच प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत किया जाना चाहिए।
आईपीसीपीए ने कहा कि भारत के तांबा उद्योग ने वर्ष 1996 से अब तक गलाने, शोधन और विनिर्माण सुविधाओं में 30,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है। उद्योग वर्ष 2030 तक अतिरिक्त क्षमता विकसित करने के लिए करीब 35,000 करोड़ रुपये के निवेश पर भी विचार कर रहा है।
आईपीसीपीए के अनुसार, घरेलू तांबा उत्पादकों पर बढ़ते आयात और वैश्विक बाजार की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के कारण दबाव है। उसके बजट-पूर्व सुझाव के मुताबिक, परिष्कृत तांबे का आयात वर्ष 2020 के 2,80,000 टन से 77 प्रतिशत बढ़कर वर्ष 2025 में 4,95,000 टन हो गया है।
भाषा राजेश राजेश अजय
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