नयी दिल्ली, 13 अक्टूबर (भाषा) सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) सेवाएं देने वाली प्रमुख कंपनी विप्रो ने मंगलवार को कहा कि अमेरिका की ओर से 'ग्रीन कार्ड' कार्यक्रम पर की गई कार्रवाई से उसके कारोबार पर कोई खास असर पड़ने की आशंका नहीं है।
अमेरिका ने हाल ही में विप्रो, माइक्रोसॉफ्ट, टीसीएस, इन्फोसिस और एचसीएलटेक सहित आठ आईटी कंपनियों को विदेशी कर्मचारियों के लिए 'ग्रीन कार्ड' आवेदन करने के एक कार्यक्रम से निलंबित कर दिया था। अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि इस प्रक्रिया के कारण अमेरिकी नागरिकों को रोजगार के अवसर नहीं मिल पा रहे हैं।
विप्रो ने मंगलवार को बीएसई को दी गई सूचना में कहा कि यह कदम स्थायी निवास हासिल करने के एक खास रास्ते से संबंधित है। यह 'एच-1बी' वीजा जैसे कुशल प्रतिभाओं की आवाजाही से जुड़े व्यापक कार्यक्रमों से अलग है।
कंपनी ने कहा, “अमेरिकी श्रम विभाग की ओर से कुछ कंपनियों के लिए नए ‘स्थायी श्रम प्रमाणन कार्यक्रम’ (पीईआरएम) आवेदनों पर रोक लगाने की हालिया घोषणा स्थायी निवास हासिल करने के एक खास रास्ते से संबंधित है। यह एच-1बी वीजा जैसे कुशल प्रतिभाओं की आवाजाही से जुड़े व्यापक कार्यक्रमों से अलग है। हमें इस घोषणा से कारोबार पर कोई खास असर पड़ने की आशंका नहीं है।”
कंपनी ने कहा कि उसने पिछले कई वर्षों में अमेरिका में स्थानीय स्तर पर कर्मचारियों की भर्ती करने की रणनीति अपनाई है। अमेरिका में उसके 80 प्रतिशत से अधिक कर्मचारी स्थानीय स्तर पर नियुक्त किए गए हैं।
बेंगलुरु मुख्यालय वाली कंपनी ने कहा कि वह स्थानीय प्रतिभाओं में निवेश करने, अमेरिका के सभी लागू कानूनों एवं नियमों का पालन करने और अपने ग्राहकों के कामकाज में निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
अमेरिकी श्रम विभाग की ओर से जारी स्थायी श्रम प्रमाणन (पीईआरएम) विदेशी कर्मचारियों को स्थायी आधार पर नियुक्त करने के इच्छुक नियोक्ताओं के लिए शुरुआती आवश्यकता है। रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड हासिल करने की प्रक्रिया में यह पहला प्रमुख कदम है।
उल्लेखनीय है कि इस रोक से प्रभावित विप्रो की अन्य प्रतिस्पर्धी कंपनियों ने भी इसी तरह की प्रतिक्रिया दी है।
भाषा
योगेश अजय
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