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दिल्ली उच्च न्यायालय ने प्रदर्शनों को विनियमित करने से जुड़ी याचिकाओं पर केंद्र से जवाब मांगा

नयी दिल्ली, 13 अक्टूबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को उन याचिकाओं पर केंद्र सरकार से उसका रुख पूछा, जिनमें व्यापारियों, विक्रेताओं और वकीलों ने राष्ट्रीय राजधानी में विरोध प्रदर्शनों को निर्धारित मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) के अनुसार विनियमित करने का अनुरोध किया है।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव सांबरे और न्यायमूर्ति संजय शर्मा की पीठ ने केंद्र सरकार और अन्य प्राधिकारियों की ओर से पेश वकीलों को निर्देश लेने को कहा। इसके बाद मामले की सुनवाई शुक्रवार के लिए सूचीबद्ध कर दी गई।

पीठ ने याचिकाकर्ताओं से उच्चतम न्यायालय में विरोध-प्रदर्शनों से संबंधित दायर याचिकाओं की एक प्रति भी रिकॉर्ड पर रखने को कहा।

पीठ ने याचिकाकर्ताओं से कहा, ‘‘हम ऐसे मामले पर विचार नहीं करना चाहते, जिस पर उच्चतम न्यायालय पहले से सुनवाई कर रहा है।’’

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने बताया कि शीर्ष अदालत में इन याचिकाओं पर सुनवाई 15 अक्टूबर तक के लिए टाल दी गई है।

इस साल जून-जुलाई से मध्य दिल्ली में निर्वाचन आयोग के कामकाज से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर कई विपक्षी दलों, छात्र संगठनों और नागरिक समाज के सदस्यों द्वारा बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन किए जा रहे हैं।

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकीलों ने दलील दी कि उच्चतम न्यायालय ने विरोध-प्रदर्शनों को विनियमित करने के संबंध में कई निर्देश दिए हैं, जिनका पालन किया जाना चाहिए।

व्यापारियों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता संजय पोद्दार ने कहा कि त्योहारों का मौसम होने के कारण अक्टूबर से फरवरी तक का समय कारोबार के लिए ‘सबसे अच्छा समय’ होता है, लेकिन हाल के विरोध-प्रदर्शनों से इस दौरान कारोबार पर प्रतिकूल असर पड़ा है।

याचिकाकर्ता और वकील ऋषभ सक्सेना की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सचिन पुरी ने जोर देकर कहा कि हाल में सैकड़ों लोगों ने मध्य दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन किया, जिससे सब कुछ ठप हो गया।

पुरी के तत्काल सुनवाई के अनुरोध को मंगलवार सुबह पीठ द्वारा स्वीकार किए जाने के बाद इन मामलों को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया।

भाषा संतोष पवनेश

पवनेश