Breaking News

अमित शाह मानहानि मामले में सुल्तानपुर कोर्ट ने राहुल गांधी को बरी किया     |   खड़गे के विवादित बयान पर भड़के बीजेपी कार्यकर्ता, पटना में बड़ा प्रोटेस्ट     |   राहुल गांधी के काफिले की गाड़ियां आपस में टकराईं, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर हादसा     |   UP: बस्ती में बाइक पर पलटा तेज रफ्तार से आ रहा ट्रक, तीन की मौत     |   आंध्र प्रदेश और दक्षिण ओडिशा की ओर बढ़ रहा चक्रवाती तूफान, ऑरेंज अलर्ट जारी     |  

महाराष्ट्र सरकार कचरे से संपीड़ित बायोगैस बनाने के संयंत्र स्थापित करेगी

मुंबई, 13 अक्टूबर (भाषा) महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शहरों को कचरा मुक्त बनाने के प्रयासों के तहत कचरे से संपीड़ित बायोगैस (सीबीजी) बनाने की परियोजनाओं में तेजी लाने के लिए कार्यबल गठित करने का अधिकारियों को निर्देश दिया है।

फडणवीस ने मंगलवार को मुंबई में आयोजित एक बैठक में प्रस्तावित परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए कहा कि राज्य की सीबीजी नीति के अनुरूप उपयुक्त स्थानों पर बायोगैस संयंत्र स्थापित किए जाने चाहिए।

उन्होंने कहा कि परियोजनाओं की योजना बनाते समय पैदा होने वाले कचरे की मात्रा, जमीन की उपलब्धता, तकनीक की उपयुक्तता और गैस पाइपलाइन से दूरी को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों, तेल कंपनियों और स्थानीय निकायों को मिलकर परियोजनाओं के क्रियान्वयन की प्रक्रिया को अंतिम रूप देना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन परियोजनाओं से नगर निगमों को कचरा संग्रहण पर होने वाले खर्च में कमी लाने में मदद मिलेगी और शहरों को कचरा मुक्त बनाने के प्रयासों को बल मिलेगा।

फडणवीस ने मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर) में ऐसे संयंत्र स्थापित करने की संभावनाएं तलाशने का सुझाव दिया। इसमें बृहन्मुंबई महानगरपालिका, वसई-विरार, मीरा-भायंदर और कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिकाओं के क्षेत्र शामिल हैं। उन्होंने पुणे के पास हिंजेवाड़ी और चाकण में भी ऐसे संयंत्र स्थापित करने की संभावना तलाशने को कहा।

बैठक में केवा ग्रीन के प्रतिनिधियों ने नागपुर में लागू की गई कचरे से बायोगैस बनाने की परियोजना पर प्रस्तुति दी और महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों में भी इस मॉडल को अपनाने की संभावनाओं की जानकारी साझा की।

एक विज्ञप्ति के अनुसार, बैठक में नागपुर की परियोजना के अनुभव, समूह आधारित संयंत्रों के विकास, कचरे के पृथक्करण, जमीन की उपलब्धता, गैस पाइपलाइन से संपर्क और विभिन्न तकनीकों के इस्तेमाल पर चर्चा हुई।

अधिकारियों ने आसपास के शहरों को शामिल करते हुए समूह आधारित मॉडल विकसित करने पर भी चर्चा की ताकि नगर निकायों के कचरे का प्रसंस्करण किया जा सके। उन्होंने कहा कि शहरों में कचरे को अलग-अलग करने और फिर शहरों के बाहर उपयुक्त स्थानों पर उसका प्रसंस्करण करने से शहरी क्षेत्रों में जमीन पर दबाव कम हो सकता है।

भाषा नरेश

नरेश