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अदालत ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने के मामले में आदेश जारी करने से किया इनकार

मुंबई, 13 अक्टूबर (भाषा) मुंबई उच्च न्यायालय ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने वाले लोगों को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के मामले में कोई भी आदेश जारी करने से मंगलवार को इनकार कर दिया। हालांकि अदालत ने भरोसा दिलाया कि अगर कोई विशिष्ट गैर-कानूनी बात उसके समक्ष लाई जाती है, तो वह उस पर कार्रवाई करेगी।

उच्च न्यायालय वकील सागर देवरे की याचिका पर सुनवाई कर रहा था। देवरे ने आरोप लगाया था कि मुंबई पुलिस ने सैकड़ों शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को अवैध रूप से हिरासत में ले लिया। इन प्रदर्शनकारियों में महिलाएं और छात्र भी शामिल थे, जिन्होंने सप्ताहांत में राष्ट्रीय राजधानी में हो रहे विरोध प्रदर्शन के समर्थन में मार्च निकाला था।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील मनीष तोमर ने अदालत से अनुरोध किया कि वह पुलिस को शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के दौरान और लोगों को हिरासत में लेने से रोकने के लिए अंतरिम आदेश जारी करे।

हालांकि, खंडपीठ ने पुलिस की कार्रवाई पर रोक लगाने के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया।

अदालत ने कहा, ‘‘हम ऐसा कोई आदेश नहीं दे सकते कि किसी भी व्यक्ति को हिरासत में नहीं लिया जाएगा। अगर ऐसा कोई मामला सामने आता है, तो आप बताएं, हम उस पर गौर करेंगे। हम कुछ भी गलत नहीं होने देंगे।’’

अतिरिक्त सरकारी वकील मनीष उपाध्याय ने याचिका में किए गए दावों के संबंध में संबंधित अधिकारियों से निर्देश प्राप्त करने के लिए समय मांगा।

उच्च न्यायालय ने अनुरोध स्वीकार करते हुए मामले की सुनवाई स्थगित कर दी और याचिका पर अगली सुनवाई के लिए 19 अक्टूबर की तारीख तय की।

देवरे की याचिका में मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ राष्ट्रीय राजधानी में हो रहे विरोध-प्रदर्शन के सिलसिले में नागरिकों, शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों, वकीलों और अन्य लोगों के मौलिक अधिकारों के संरक्षण का अनुरोध किया गया था।

याचिका में कहा गया है कि जब मुंबई के नागरिकों ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के लिए अपनी एकजुटता प्रदर्शित करने के वास्ते 10 और 11 अक्टूबर को शहर भर में शांतिपूर्ण पदयात्रा निकाली, तो पुलिस ने अनावश्यक रूप से और बिना किसी प्राधिकार के सैकड़ों लोगों को हिरासत में ले लिया जिनमें बच्चों के साथ मौजूद महिलाएं और छात्र भी शामिल थे।

याचिका के अनुसार, ‘‘कानून प्रवर्तन एजेंसियों को अत्यधिक संयम बरतना चाहिए और शांतिपूर्ण एकत्र होने के अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए।’’

याचिका में पुलिस को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि वह शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को मनमाने और असंवैधानिक तरीके से हिरासत में न ले।

भाषा सुभाष नरेश

नरेश