नयी दिल्ली, 13 अक्टूबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को 2024 में छत्तीसगढ़ में 34 वर्षीय व्यक्ति की हिरासत में मौत के मामले से जुड़ी परिस्थितियों की जांच पूरी करने के लिए तीन महीने का अतिरिक्त समय दिया।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने इस बात का संज्ञान लिया कि अपनी सीलबंद रिपोर्ट में, एजेंसी ने जांच को उसके तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाने के लिए और समय की मांग की है।
शीर्ष अदालत ने बिलासपुर सेंट्रल जेल में बंद श्रवण सूर्यवंशी की 2024 में मौत की जांच 12 अगस्त को सीबीआई को सौंपी थी। न्यायालय ने राज्य को सूर्यवंशी की पत्नी और बच्चों को 25 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया था।
अदालत ने सीबीआई निदेशक से यह भी कहा था कि उसकी मौत के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमित आपराधिक मामला दर्ज कराया जाए। मंगलवार को, पीठ ने जांच एजेंसी को जांच पूरी करने के लिए तीन महीने का समय दिया और मामले की अगली सुनवाई 2 फरवरी के लिए सूचीबद्ध कर दी।
गत 12 अगस्त को छत्तीसगढ़ के अधिकारियों से नाखुशी जताते हुए शीर्ष अदालत ने कहा था कि यह स्पष्टीकरण एक ‘‘लीपापोती करने वाली बात और अदालत की आंखों में धूल झोंकने का प्रयास’’ था कि जिम्मेदार लोगों के खिलाफ न तो कोई पुलिस कार्रवाई की गई और न ही कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई क्योंकि न्यायिक जांच रिपोर्ट पुलिस अधिकारियों को नहीं सौंपी गई थी।
अदालत ने कहा कि इन तथ्यों के आधार पर तुरंत प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए और सूर्यवंशी की मौत के कारणों की गहन जांच होनी चाहिए, जिसे राज्य के अधिकारियों ने जानबूझकर और आसानी से दबाने की कोशिश की।
शीर्ष अदालत ने कहा था, ‘‘मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए, हमारी दृढ़ राय है कि न्याय के हित में यह आवश्यक है कि श्रवण की हिरासत में हुई मौत के कारणों की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो को सौंपी जाए और हिरासत में हुई हिंसा के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले सभी अधिकारियों के खिलाफ, जांच पूरी होने के बाद, कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए और मुकदमा चलाया जाए।’’
शीर्ष अदालत ने यह आदेश सूर्यवंशी की पत्नी और बच्चों द्वारा दायर एक याचिका पर पारित किया था, जिसमें छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के अक्टूबर 2024 के आदेश को चुनौती दी गई थी।
उच्च न्यायालय ने 50 लाख रुपये के मुआवजे और हिरासत में मौत के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग वाली याचिका पर आदेश पारित किया था।
उच्चतम न्यायालय ने इस बात का संज्ञान लिया कि उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं को महज एक लाख रुपये का मुआजवा देने का आदेश दिया और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सीधी कार्रवाई के अनुरोध को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया।
भाषा वैभव नरेश
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