नयी दिल्ली, 13 अक्टूबर (भाषा) यात्री वाहनों के लिए औसत कर्ज की राशि 2019 की पहली छमाही के मुकाबले 2026 की पहली छमाही में 49 प्रतिशत बढ़कर 8.2 लाख रुपये हो गई। वहीं, कर्ज चुकाने की औसत अवधि पांच महीने बढ़कर 62 महीने हो गई। यह कारों की बढ़ती कीमतों और उपभोक्ताओं की आकांक्षाओं में बदलाव का संकेत है।
ट्रांसयूनियन सिबिल की मंगलवार को जारी ‘शिफ्टिंग गियर्स 2026-क्रेडिट ड्राइव्स टुडेज मोबिलिटी’ शीर्षक वाली रिपोर्ट के अनुसार, एसयूवी और अधिक सुविधाओं वाली कारों की मांग के कारण महंगे वाहनों की ओर रुझान महानगरों से आगे भी बढ़ रहा है। जनवरी-जून की अवधि में अधिक कीमत वाली कारों के लिए कर्ज लेने वाले लोगों में 51 प्रतिशत अर्धशहरी और ग्रामीण क्षेत्रों से थे।
गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) वाहन वित्तपोषण में आगे बनी रहीं। दोपहिया वाहनों के लिए दिए गए कुल कर्ज में उनकी हिस्सेदारी 73 प्रतिशत और यात्री वाहनों के लिए दिए गए कर्ज में 37 प्रतिशत रही।
जून, 2026 तक यात्री वाहन कर्ज लेने वाले सक्रिय लोगों की संख्या बढ़कर 2.5 करोड़ हो गई, जो जून, 2019 के स्तर से 1.7 गुना है। यात्री वाहन कर्ज में 90 दिन से अधिक समय से बकाया राशि के आधार पर मापी जाने वाली किस्त चूक दर जून, 2019 के 1.45 प्रतिशत के स्तर से घटकर 0.5 प्रतिशत रह गई।
ट्रांसयूनियन सिबिल के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) भावेश जैन ने कहा, ‘‘कार का मालिक बनने की इच्छा अब आकांक्षाओं और किफायत दोनों से प्रभावित हो रही है। उपभोक्ता अधिक कीमत और बेहतर सुविधाओं वाले वाहन चुन रहे हैं, जबकि कर्ज की बड़ी राशि और उसे चुकाने के लिए लंबी अवधि इन खरीद को उनके लिए अधिक आसान बना रही है।’’
रिपोर्ट के अनुसार, 2026 की पहली छमाही में दोपहिया वाहन कर्ज लेने वालों में अर्धशहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों की हिस्सेदारी 64 प्रतिशत रही, जबकि 43 प्रतिशत कर्जदारों की उम्र 30 वर्ष या उससे कम थी।
भाषा निहारिका अजय
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