मुंबई, 13 अक्टूबर (भाषा) राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष सुनील तटकरे ने चुनाव हारने के बाद निर्वाचन आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने और इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) पर शक जाहिर करने को लेकर विपक्षी दलों की आलोचना की एवं कहा कि ऐसा रवैया लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है।
तटकरे ने कहा कि निर्वाचन आयोग एक स्वतंत्र संस्था है तथा उसकी स्वायत्तता की रक्षा की ही जानी चाहिए।
उन्होंने यहां पत्रकारों से कहा, ‘‘विपक्षी दलों की भिन्न राय और नजरिये हो सकते हैं, लेकिन इस तरह से स्वतंत्र संस्थाओं पर बार-बार सवाल उठाना लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है।’’
उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाली राकांपा महाराष्ट्र के सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन की एक घटक है।
वर्ष 2004 और 2009 के लोकसभा चुनावों में ईवीएम से हुए चुनावों में कांग्रेस-नीत संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की जीत का उल्लेख करते हुए तटकरे ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा-नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की जीत के बाद ही इन मशीनों पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद हुए महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव का हवाला देते हुए कहा, ‘‘चार महीनों में क्या बदला? मशीनें तो वही थीं। फर्क सिर्फ चुनाव के नतीजों का था।’’
तटकरे ने कहा कि जब महाराष्ट्र में लोकसभा चुनाव में महा विकास आघाडी (एमवीए) ने 48 में से 31 सीट जीती थीं, तो उसने ईवीएम पर कोई आरोप नहीं लगाया था, जबकि महायुति को 17 सीट मिली थीं।
उन्होंने कहा कि लेकिन विधानसभा चुनाव में महायुति की निर्णायक जीत के बाद चुनावी प्रक्रिया की आलोचना शुरू हो गई।
राकांपा नेता ने कहा, ‘‘हार के लिए दूसरों को दोष देना और जीत का श्रेय खुद लेना विपक्ष में बढ़ती हुई प्रवृत्ति है। मुझे नहीं लगता कि ऐसा रवैया लोकतंत्र के लिए अच्छा है।’’
उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि देश को अस्थिर करने की कोशिश करने वाले संगठनों को विदेश से चंदा मिलने के आरोपों के बारे में उनके पास कोई खास जानकारी नहीं है और केंद्र सरकार इस मामले की जांच कर सकती है।
उन्होंने कहा, ‘‘अगर कोई बाहरी ताकत अलग-अलग तरीकों से देश को अस्थिर करने की कोशिश कर रही है, तो यह निश्चित रूप से राष्ट्रहित में नहीं होगा।’’
भाषा राजकुमार सुरेश
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