(फोटो के साथ)
तिरुवनंतपुरम, 13 अक्टूबर (भाषा) केरलम विधानसभा में विपक्ष के नेता पिनरायी विजयन ने राज्य की संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) सरकार पर लोकतांत्रिक प्रदर्शनों को दबाने के लिए पुलिस का इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए मंगलवार को कहा कि यूडीएफ सरकार संघ परिवार की फासीवादी नीतियों का अनुसरण कर रही है।
विजयन ने सोशल मीडिया मंच फेसबुक पर एक पोस्ट में हाल में पालक्कड़ में स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) के प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं के साथ पुलिस की कथित बर्बरता और पिछले महीने केरल विश्वविद्यालय के एक छात्रावास में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की छात्र इकाई के सदस्यों पर लाठीचार्ज का जिक्र किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस की ज्यादतियां दिन-ब-दिन बढ़ रही हैं।
मार्क्सवादी नेता ने दावा किया कि इन घटनाओं से पता चलता है कि गृह विभाग अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में विफल रहा है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने तत्काल पुलिस पर लगाम नहीं लगाई और यह सुनिश्चित नहीं किया कि पुलिसकर्मी कानून के अनुसार काम करें, तो राज्य में जनता का जोरदार विरोध देखने को मिलेगा।
पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि हाल में पालक्कड में एक पुलिस अधिकारी ने नशे की हालत में छात्राओं समेत एसएफआई कार्यकर्ताओं के साथ बेरहमी से मारपीट की थी।
विजयन ने कहा कि छात्र मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने संघ परिवार की कथित रणनीति अपनाते हुए लाठियों और नशीले पदार्थों के इस्तेमाल के जरिये उनके प्रदर्शन को दबाने की कोशिश की।
उन्होंने पालक्कड की घटना का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘छात्र तुरंत अधिकारियों के संज्ञान में यह मामला लाए और मीडिया ने भी इसकी फुटेज प्रसारित की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। पुलिस अधिकारी को अन्य पुलिसकर्मी तत्काल पुलिस वाहन में घटनास्थल से ले गए।’’
विपक्ष के नेता ने दावा किया कि संबंधित अधिकारी को निलंबित करने पर सरकार तभी सहमत हुई, जब विधानसभा में विपक्ष ने इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया।
विजयन ने कहा, ‘‘किसी भी सरकार के लिए यह उचित नहीं है कि वह गलत काम करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले विधानसभा में विपक्ष के विरोध का इंतजार करे।’’
विजयन ने दावा किया कि 30 सितंबर की रात विश्वविद्यालय के छात्रावास में एसएफआई कार्यकर्ताओं पर कथित तौर पर हमला करने और बाद में सोशल मीडिया पर छात्रों को धमकाने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि यूडीएफ सरकार की जिम्मेदारी है कि वह पुलिस बल में ऐसे कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करे।
विजयन ने कहा, ‘‘लोकतांत्रिक तरीके से विरोध कर रहे लोगों को दबाने के लिए ऐसे आपराधिक प्रवृत्ति वाले पुलिसकर्मियों को तैनात करने का चलन अस्वीकार्य है।’’
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