Breaking News

अमित शाह मानहानि मामले में सुल्तानपुर कोर्ट ने राहुल गांधी को बरी किया     |   खड़गे के विवादित बयान पर भड़के बीजेपी कार्यकर्ता, पटना में बड़ा प्रोटेस्ट     |   राहुल गांधी के काफिले की गाड़ियां आपस में टकराईं, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर हादसा     |   UP: बस्ती में बाइक पर पलटा तेज रफ्तार से आ रहा ट्रक, तीन की मौत     |   आंध्र प्रदेश और दक्षिण ओडिशा की ओर बढ़ रहा चक्रवाती तूफान, ऑरेंज अलर्ट जारी     |  

सेमीकंडक्टर विनिर्माण में वैश्विक भूमिका निभाने की स्थिति में भारत: चंद्रशेखरन

(फाइल फोटो के साथ)

नयी दिल्ली, 13 अक्टूबर (भाषा) टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने मंगलवार को कहा कि सेमीकंडक्टर भारत के भविष्य के लिए बेहद अहम होंगे। देश में कुशल प्रतिभाओं, बड़े घरेलू बाजार और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी की संभावनाओं को देखते हुए भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की स्थिति में है।

‘ब्लूमबर्ग न्यू इकॉनमी फोरम 2026’ में चंद्रशेखरन ने कहा कि तेजी से अनिश्चित होते वैश्विक माहौल में कारोबार क्षेत्रों को दक्षता के बजाय मजबूती को प्राथमिकता देनी चाहिए क्योंकि भू-राजनीतिक तनाव, कृत्रिम मेधा (एआई) से होने वाले बदलाव, जिंस कीमतों का दबाव और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े संकट एक साथ सामने आ रहे हैं।

उन्होंने किसी रणनीति या योजना की सफलता को लेकर निश्चित समयसीमा के सवाल के जवाब में कहा, ‘‘इसलिए, हम दो साल में या तीन साल में सही दिशा में आगे बढ़ पाएंगे और तय आंकड़ों तक पहुंचेंगे या नहीं, यह मुख्य बात नहीं है। मुख्य बात यह है कि घरेलू खपत के लिए चिप की जरूरत बुनियादी तौर पर बनी रहने वाली है।’’

चंद्रशेखरन ने कहा कि कुशल प्रतिभाओं, बड़े घरेलू बाजार और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भागीदारी की क्षमता के कारण भारत सेमीकंडक्टर विनिर्माण की क्षमताएं विकसित करने के लिए अनुकूल स्थिति में है।

उन्होंने कहा, ‘‘भारत में हमारे पास बहुत अच्छी स्थिति है क्योंकि हमारे पास प्रतिभाएं हैं, घरेलू बाजार है और हम हर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भूमिका निभा सकते हैं।’’

इस क्षेत्र का पूरा परिवेश विकसित करने में साझेदारी के महत्व पर जोर देते हुए चंद्रशेखरन ने कहा कि जरूरी प्रौद्योगिकियां हासिल करने के लिए भारत को वैश्विक कंपनियों के साथ मिलकर काम करना होगा। साथ ही, ऊर्जा की जरूरतों पर भी करीबी नजर रखनी होगी।

उन्होंने कहा, ‘‘हमें साझेदारी की जरूरत है, क्योंकि हमारे पास सभी प्रौद्योगिकियां हैं... लेकिन अगर आप इसे डिजाइन करते हैं, तो निश्चित रूप से हम वहां तक पहुंच जाएंगे। हालांकि, आपको सावधान भी रहना होगा, क्योंकि ऊर्जा की जरूरतों पर नजर रखना जरूरी है।’’

टाटा समूह की कंपनी टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, ताइवान की पावरचिप सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कॉरपोरेशन (पीएसएमसी) के साथ साझेदारी में गुजरात के धोलेरा में करीब 91,000 करोड़ रुपये के निवेश से सेमीकंडक्टर चिप विनिर्माण संयंत्र (फैब) स्थापित कर रही है।

प्रस्तावित संयंत्र में मोटर वाहन, मोबाइल उपकरण, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, कृत्रिम मेधा (एआई) और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में इस्तेमाल होने वाले चिप बनाए जाएंगे।

समूह असम में भी करीब 27,000 करोड़ रुपये के निवेश से सेमीकंडक्टर चिप की असेंबली और जांच की सुविधा विकसित कर रहा है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य बढ़ती घरेलू मांग को पूरा करना, भारत की सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना और देश को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण तंत्र से अधिक मजबूती से जोड़ना है।

सेमीकंडक्टर क्षेत्र में विस्तार उन्नत विनिर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स और बैटरी प्रौद्योगिकियों में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की टाटा समूह की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

चंद्रशेखरन ने कहा कि ये निवेश समूह के इस विश्वास को दर्शाते हैं कि लंबे समय में सेमीकंडक्टर विनिर्माण की क्षमता जरूरी होगी। हालांकि, परियोजनाओं को लागू करने की गति और प्रौद्योगिकियों के चयन को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

उन्होंने सबसे उन्नत चिप विनिर्माण प्रौद्योगिकियों को अपनाने से पहले बाजार की मांग और आर्थिक व्यवहार्यता का सही आकलन करने की जरूरत पर भी जोर दिया।

टाटा संस के चेयरमैन ने कहा, ‘‘आप बिना सोचे-समझे यह नहीं कह सकते कि मैं दो नैनोमीटर चिप बनाने का संयंत्र लगाने जा रहा हूं। यह काम नहीं करेगा। इसलिए हमें यह भी देखना होगा कि मांग कहां है।’’

उन्होंने कहा कि निवेश व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य होना चाहिए और लंबे समय तक रोजगार के टिकाऊ अवसर पैदा करने में सक्षम होना चाहिए।

टाटा समूह के भविष्य को लेकर ‘बोर्डरूम’ में जारी खींचतान के बीच हाल में चंद्रशेखरन को टाटा संस के चेयरमैन के रूप में तीसरा, पांच साल का कार्यकाल दिया गया था।

वैश्विक कारोबारी माहौल में अनिश्चितताओं को स्वीकार करते हुए चंद्रशेखरन ने कहा कि कंपनियां निवेश से जुड़ी हर बात का पहले से अनुमान होने की उम्मीद नहीं कर सकतीं।

उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन बहुत-सी चीजें निश्चित हैं। ऊर्जा की जरूरत निश्चित है, काम करने का तरीका निश्चित है और उसे लागू करने की क्षमता निश्चित है। केवल यह तय करना है कि आप उत्पादन कितना बढ़ाते हैं, कितनी तेजी से बढ़ाते हैं और किस प्रौद्योगिकी को अपनाते हैं...।’’

टाटा समूह की दीर्घकालिक निवेश नीति को समझाने के लिए चंद्रशेखरन ने समूह के इतिहास का जिक्र किया।

उन्होंने बताया कि जमशेदजी टाटा ने 20वीं सदी की शुरुआत में ही इस्पात और पनबिजली के महत्व को पहचान लिया था।

चंद्रशेखरन ने कहा कि समूह का इस्पात संयंत्र 1907 में स्थापित हुआ, जबकि पनबिजली कारोबार की शुरुआत 1911 में हुई थी। यह उस दूरदर्शी सोच को दर्शाता है, जिसके तहत भारत की भविष्य की औद्योगिक जरूरतों का पहले ही आकलन कर लिया गया था।

उन्होंने कहा कि समूह को विमान दुर्घटना, साइबर हमले और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बावजूद उसने अपना काम जारी रखा।

भाषा निहारिका अजय

अजय