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कुछ बच्चे कोविड के कारण गंभीर रूप से बीमार क्यों पड़ते हैं? उनके जीन में छिपा हो सकता है इसका जवाब

(नेगुसे टडेसे किटाबा और जॉन डब्ल्यू होलोवे, साउथहैंपटन विश्वविद्यालय)

साउथहैंपटन, 13 अक्टूबर (द कन्वरसेशन) कोविड का कारण बनने वाले वायरस ‘सार्स-सीओवी-2’ से संक्रमित अधिकांश बच्चों में हल्के लक्षण दिखाई देते हैं या उनमें कोई लक्षण नहीं होता। लेकिन कुछ बच्चों में संक्रमण गंभीर रूप ले लेता है और कभी-कभी उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत भी पड़ती है।

अब तक यह स्पष्ट नहीं था कि कुछ ही बच्चों में संक्रमण गंभीर क्यों हो जाता है। लेकिन हमारे हालिया अध्ययन से कोविड जैसी गंभीर श्वसन संबंधी बीमारियों के दौरान शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली की प्रतिक्रिया को लेकर नयी जानकारियां सामने आई हैं।

हमारे अध्ययन में दक्षिण अफ्रीका के 333 ऐसे बच्चों के रक्त में जीन की सक्रियता से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण किया गया, जिनकी आनुवंशिक पृष्ठभूमि एक जैसी थी। जीन की सक्रियता का अध्ययन एक साथ हजारों जीन की गतिविधियों को मापता है। इसके विश्लेषण से पता लगाया जा सकता है कि संक्रमण के जवाब में कौन-से जीन सक्रिय हुए और कौन-से निष्क्रिय हो गए।

इन बच्चों में से 127 को स्वस्थ माना गया, 71 में कोविड के हल्के लक्षण थे या कोई लक्षण नहीं था, जबकि 41 को गंभीर कोविड के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसके अलावा, 47 बच्चे श्वसन तंत्र को प्रभावित करने वाले ‘रेस्पिरेटरी सिंसिशियल वायरस’ (आरएसवी) के संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती थे और 47 बच्चों को फेफड़ों का तपेदिक था। अध्ययन में केवल उन्हीं बच्चों को शामिल किया गया, जो श्वसन संबंधी किसी एक ही संक्रमण से प्रभावित थे। हमने अपने विश्लेषण में बच्चों की उम्र के अंतर को भी ध्यान में रखा।

हमारे अध्ययन में ऐसे हजारों जीन की पहचान हुई जिनकी गतिविधियां गंभीर कोविड और अन्य श्वसन संक्रमणों से पीड़ित बच्चों में स्वस्थ बच्चों की तुलना में अलग थीं।

गंभीर श्वसन संक्रमण से जूझ रहे बच्चों में 5,000 से अधिक जीन की सक्रियता में बदलाव देखा गया। इनमें से कई जीन शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया से जुड़े थे।

उदाहरण के लिए, गंभीर श्वसन संक्रमण से पीड़ित बच्चों में न्यूट्रोफिल की प्रतिक्रिया अधिक मजबूत थी। न्यूट्रोफिल एक प्रकार की प्रतिरक्षा कोशिकाएं हैं, जो संक्रमण के खिलाफ शरीर की त्वरित और शुरुआती रक्षा प्रणाली का हिस्सा होती हैं।

इसी तरह, इंटरफेरॉन-गामा संकेत प्रणाली भी सक्रिय पाई गई। यह शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को रोगाणुओं के खिलाफ व्यवस्थित करने में अहम भूमिका निभाती है।

दिलचस्प बात यह है कि अध्ययन में गंभीर श्वसन संक्रमण से पीड़ित बच्चों के रक्त में मौजूद प्रतिरक्षा कोशिकाओं के प्रकार और उनके अनुपात में भी महत्वपूर्ण अंतर पाया गया। गंभीर संक्रमण से जूझ रहे बच्चों के रक्त में ‘मैक्रोफेज’ की मात्रा काफी अधिक थी। ये शरीर की जन्मजात प्रतिरक्षा प्रणाली की कोशिकाएं हैं। इसके विपरीत, उनमें टी कोशिकाओं का अनुपात कम था जो शरीर की समग्र प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया का समन्वय करती हैं।

हल्के या बिना लक्षण वाले कोविड से संक्रमित बच्चों और स्वस्थ बच्चों में इस तरह के बदलाव नहीं देखे गए।

अध्ययन के सबसे दिलचस्प निष्कर्षों में से एक यह था कि कोविड, आरएसवी संक्रमण और फेफड़ों के तपेदिक के दौरान शरीर की कुछ प्रतिरक्षा प्रतिक्रियाएं एक जैसी थीं। हमने प्रतिरक्षा कोशिकाओं के कुल सात प्रकारों की पहचान की, जिनकी गतिविधियों में इन तीनों श्वसन संबंधी बीमारियों के दौरान समान पैटर्न दिखाई दिए। इससे संकेत मिलता है कि फेफड़ों के गंभीर संक्रमण से जूझने के दौरान बच्चों का शरीर बचाव के कुछ समान तरीके अपना सकता है।

इसके साथ ही, जीन की सक्रियता के कुछ पैटर्न केवल खास संक्रमणों में दिखाई दिए। इससे पता चलता है कि अलग-अलग बीमारियों के पीछे महत्वपूर्ण जैविक अंतर भी होते हैं। यदि ऐसे संकेतों की पहचान की जा सके, जिनसे विभिन्न श्वसन संक्रमणों के बीच अंतर करना संभव हो, तो यह उपयोगी होगा। ऐसा इसलिए, क्योंकि अलग-अलग संक्रमणों के इलाज के लिए अलग-अलग उपचारों की जरूरत होती है।

अध्ययन में ऐसे 82 जीन की पहचान भी की गई, जिनकी मदद से गंभीर कोविड संक्रमण और हल्के लक्षणों या बिना लक्षण वाले संक्रमण के बीच अंतर किया जा सकता है। इससे भविष्य में जीन की सक्रियता के विशिष्ट पैटर्न के आधार पर यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि किन बच्चों में संक्रमण के गंभीर रूप लेने का जोखिम सबसे अधिक है। जीन की सक्रियता के ये पैटर्न किसी खास समय पर शरीर में सक्रिय जीन की स्थिति दर्शाते हैं।

बचपन में प्रतिरक्षा प्रणाली की प्रतिक्रिया

श्वसन संक्रमण से पीड़ित बच्चे अक्सर लगभग एक जैसे लक्षणों के साथ अस्पताल पहुंचते हैं। फिर भी, इन बीमारियों के पीछे काम करने वाली जैविक प्रक्रियाएं एक-दूसरे से काफी अलग हो सकती हैं।

स्वस्थ बच्चों की तुलना आम श्वसन संक्रमणों से पीड़ित बच्चों के साथ करके हम यह समझने लगे हैं कि बचपन में प्रतिरक्षा प्रणाली की प्रतिक्रिया के कौन-से पहलू अलग-अलग संक्रमणों में समान होते हैं और कौन-से विशिष्ट। इन अंतरों को समझने से भविष्य में डॉक्टरों को संक्रमण की पहचान करने, बीमारी की निगरानी करने और मरीज की जरूरत के मुताबिक उपचार तय करने में मदद मिल सकती है।

इस अध्ययन में सामने आए कुछ जीन भविष्य के शोध के लिए महत्वपूर्ण भी हो सकते हैं। ये उन वैज्ञानिकों के लिए विशेष रूप से उपयोगी साबित हो सकते हैं, जो यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि बीमारी की गंभीरता का पहले से अनुमान लगाया जा सकता है या नहीं। गंभीर संक्रामक बीमारियों के लिए नए उपचार विकसित करने में भी इनसे मदद मिल सकती है।

हालांकि, ये निष्कर्ष आशाजनक हैं लेकिन इन्हें चिकित्सा के क्षेत्र में बड़ी सफलता के बजाय खोज की दिशा में एक महत्वपूर्ण शुरुआती कदम माना जाना चाहिए। गंभीर बीमारी के जोखिम वाले बच्चों की पहचान के लिए इन जीन का इस्तेमाल करने से पहले बच्चों के बड़े समूहों में इनकी जांच करना जरूरी होगा।

द कन्वरसेशन

खारी नरेश

नरेश