मुंबई, 13 अक्टूबर (भाषा) शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने पार्टी की मौजूदा राजनीतिक दिशा से मतभेदों का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया है और पार्टी के हिंदुत्व की मूल विचारधारा से ‘‘दूर जाने’’ को लेकर भी चिंता जताई है।
दुबे को शिवसेना (उबाठा) के विधायक आदित्य ठाकरे का करीबी सहयोगी और पार्टी के प्रमुख उत्तर भारतीय चेहरों में से एक माना जाता रहा है। उन्होंने राष्ट्रीय और महाराष्ट्र से जुड़े कई मुद्दों पर संगठन के रुख की भी आलोचना की।
दुबे ने कहा कि वह उन वैचारिक सिद्धांतों से समझौता करने के इच्छुक नहीं हैं, जिन्होंने उनकी राजनीतिक यात्रा को दिशा दी है।
सोमवार को इस्तीफा देने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए दुबे ने कहा कि बाल ठाकरे की शिवसेना का निर्माण हिंदुत्व के आधार पर हुआ था जिसने पार्टी को एक अलग राजनीतिक पहचान दी।
उन्होंने कहा, ‘‘शिवसेना की ऐतिहासिक पहचान हिंदुत्व, मराठी अस्मिता और बालासाहेब ठाकरे की वैचारिक विरासत से जुड़ी रही है। पार्टी की मौजूदा राजनीतिक स्थिति और मेरी अपनी वैचारिक प्रतिबद्धताओं के बीच बढ़ते मतभेदों के कारण मेरे लिए पार्टी के आधिकारिक रुख को व्यक्त करना मुश्किल हो गया है।’’
दुबे ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (उबाठा) की कांग्रेस और उसके नेता राहुल गांधी के साथ बढ़ती राजनीतिक नजदीकी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक गठबंधन किसी पार्टी की बुनियादी विचारधारा और स्वतंत्र पहचान की कीमत पर नहीं होने चाहिए।
कुछ उद्योगपतियों के सत्तारूढ़ व्यवस्था के करीब होने के आरोपों को लेकर भी उन्होंने शिवसेना (उबाठा) की आलोचना की। दुबे ने कहा कि मुकेश अंबानी और गौतम अडाणी से जुड़े कारोबार सहित भारतीय कंपनियों के निवेश, आर्थिक योगदान और रोजगार सृजन संबंधी गतिविधियों का आकलन तथ्यों और एकसमान मानकों के आधार पर किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की आलोचना तथ्यों तथा नीतिगत मतभेदों पर आधारित होनी चाहिए।
भाषा गोला मनीषा नरेश
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