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दवाओं की कमी और रिक्त पदों के मुद्दे पर केरलम विधानसभा से विपक्षी एलडीएफ का बहिर्गमन

तिरुवनंतपुरम, 13 अक्टूबर (भाषा) केरलम विधानसभा में मंगलवार को राज्य में दवाओं की कथित कमी और स्वास्थ्य क्षेत्र में रिक्त पदों सहित अन्य समस्याओं को लेकर तीखी बहस हुई। इस दौरान विपक्षी वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) ने स्वास्थ्य मंत्री पर मुद्दे को गंभीरता से नहीं लेने का आरोप लगाते हुए सदन से बहिर्गमन किया।

माकपा विधायक के वी सुमेश ने कार्यस्थगन प्रस्ताव का नोटिस देकर यह मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य का स्वास्थ्य क्षेत्र ‘वेंटिलेटर’ पर है, जिस पर सत्तारूढ़ दल के सदस्यों ने विरोध जताया।

स्वास्थ्य मंत्री के मुरलीधरन ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि स्वास्थ्य विभाग में ऐसा कोई संकट नहीं है, जिसके कारण सदन का अन्य कामकाज रोककर इस पर चर्चा की जाए।

मंत्री ने कहा कि आदर्श आचार संहिता लागू होने के कारण मार्च में दवाओं की खरीद के आदेश जारी नहीं किए गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली एलडीएफ सरकार दवा कंपनियों का भारी बकाया छोड़ गई थी।

हालांकि, कुछ दवाओं की उपलब्धता में आ रही दिक्कतों को स्वीकार करते हुए उन्होंने कहा कि इस समस्या को दूर करने के लिए तत्काल कदम उठाए गए हैं।

विपक्ष ने आरोप लगाया कि मंत्री स्वास्थ्य क्षेत्र की समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। सुमेश ने सवाल किया कि यदि नई सरकार पिछली सरकार पर ही समस्याओं का ठीकरा फोड़ने वाली है, तो लोगों ने उसे चुना ही क्यों। उन्होंने दवाओं की कमी को लेकर मीडिया में आई विभिन्न खबरों का भी हवाला दिया।

विपक्ष ने कहा कि मंत्री को अपने ही विभाग की समस्याओं को समझना चाहिए और अधिकारियों को विश्वास में लेकर कदम उठाने चाहिए। उसने आरोप लगाया कि तबादलों में राजनीतिक विचारों को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने सरकार से इन समस्याओं का तत्काल समाधान करने की मांग की।

नेता प्रतिपक्ष पिनराई विजयन ने मंत्री पर गंभीरता की कमी का आरोप लगाते हुए सवाल किया कि कुछ दवाओं की उपलब्धता में बताई गई कमी को क्या दवाओं की किल्लत नहीं माना जाना चाहिए।

उन्होंने यह आशंका भी जताई कि इस संकट के पीछे राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र को बड़े कॉरपोरेट समूहों के हवाले करने की कथित मंशा हो सकती है।

बाद में विपक्षी सदस्यों ने विरोध में सदन से बहिर्गमन किया।

भाषा

वैभव

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