नयी दिल्ली, 13 अक्टूबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय वकीलों और व्यापारियों की उन याचिकाओं पर मंगलवार को सुनवाई के लिए सहमत हो गया जिनमें मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) के अनुसार राष्ट्रीय राजधानी में विरोध प्रदर्शनों को विनियमित करने का अनुरोध किया गया है।
वरिष्ठ अधिवक्ता सचिन पुरी ने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव सांबरे और न्यायमूर्ति संजय शर्मा की पीठ के समक्ष याचिकाओं का उल्लेख किया। इसमें दलील दी गई कि प्रदर्शन इस प्रकार होने चाहिए जिससे वकीलों के पेशेवर काम और व्यापारियों के कारोबार में बाधा न पहुंचे।
पुरी ने अदालत में दलील दी, ‘‘हाल के दिनों में अवरोधक लगाने और प्रदर्शनों के तरीके के कारण व्यापारियों को 2,000 करोड़ रुपये तक का नुकसान हुआ है... लोग कनॉट प्लेस जैसे इलाकों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। वहां तक पहुंचना लगभग नामुमकिन हो गया है।’’
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) चेतन शर्मा ने अदालत को अवगत कराया कि इस विषय से जुड़े मुद्दे मुख्य रूप से पहले से ही उच्चतम न्यायालय के समक्ष लंबित हैं।
पीठ ने मामले को सूचीबद्ध करने पर सहमति व्यक्त करते हुए निर्देश दिया कि इन याचिकाओं पर मंगलवार को दैनिक वाद सूची के अंत में विचार किया जाएगा।
मध्य दिल्ली में विभिन्न मुद्दों को लेकर कई विपक्षी दलों, छात्र संगठनों और नागरिक समाज के सदस्यों द्वारा बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं।
भाषा खारी मनीषा
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