लखनऊ, 12 अक्टूबर (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने कनिष्ठ खाद्य विश्लेषक के 417 पदों पर भर्ती में खाद्य प्रौद्योगिकी, डेयरी प्रौद्योगिकी, ऑयल टेक्नोलॉजी और जैव प्रौद्योगिकी में बीटेक डिग्रीधारकों को पात्र घोषित करने की मांग खारिज कर दी है। पीठ ने राज्य सरकार की ओर से निर्धारित शैक्षणिक योग्यता संबंधी नियमों को वैध ठहराते हुए कहा कि सरकार को अपने विभागीय संवर्ग के पदों के लिए योग्यता तय करने का अधिकार है।
न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की पीठ ने पंकज कुमार और अन्य की याचिका पर यह फैसला सुनाया। याचिका में वर्ष 2020 में संशोधित सेवा नियमावली के नियम 8(2) और भर्ती विज्ञापन को चुनौती दी गई थी।
याचिकाकर्ताओं की दलील थी कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक नियमावली, 2011 में खाद्य विश्लेषक के पद के लिए कई विषयों में स्नातक डिग्री को मान्यता दी गई है। ऐसे में संबंधित विषयों में बीटेक डिग्रीधारक अभ्यर्थियों को कनिष्ठ खाद्य विश्लेषक की भर्ती से बाहर नहीं रखा जा सकता।
वहीं, राज्य सरकार ने दलील दी कि कनिष्ठ खाद्य विश्लेषक और खाद्य विश्लेषक अलग-अलग पद हैं। कनिष्ठ खाद्य विश्लेषक राज्य सरकार के विभागीय संवर्ग का पद है, जबकि खाद्य विश्लेषक की नियुक्ति केंद्रीय कानून और उसके तहत निर्धारित नियमों के अनुसार होती है।
पीठ ने सरकार की दलील स्वीकार करते हुए कहा कि खाद्य विश्लेषक के पद के लिए निर्धारित केंद्रीय नियम राज्य सरकार को कनिष्ठ खाद्य विश्लेषक की भर्ती में सभी वैकल्पिक योग्यताओं को शामिल करने के लिए बाध्य नहीं करते। इसी आधार पर उच्च न्यायालय ने याचिका खारिज कर दी।
भाषा सं आनन्द सुरभि
सुरभि