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ओडिशा के मुख्यमंत्री ने 'एसआईआर' को बताया जरूरी, कांग्रेस ने कहा 'सुनियोजित वोट चोरी'

भुवनेश्वर, 12 अक्टूबर (भाषा) ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने सोमवार को विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को चुनावी निष्पक्षता बनाए रखने और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए एक “आवश्यक कवायद” बताया जबकि विपक्षी कांग्रेस ने इसे “सुनियोजित वोट चोरी” करार दिया।

माझी की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब विपक्षी दल मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और पूरी 'एसआईआर' कवायद को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि इस कवायद के कारण मतदाता सूची से करीब 13 करोड़ पात्र मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, “चुनाव प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए एसआईआर जरूरी और रचनात्मक प्रक्रिया है। इसे निष्पक्षता और पूरी सावधानी के साथ प्रभावी ढंग से लागू करने से चुनावी रिकॉर्ड की विश्वसनीयता बनाए रखने में मदद मिलेगी और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को वह भरोसा मिलेगा जिसकी वह हकदार है।”

बीजू जनता दल (बीजद) और कांग्रेस दोनों ने माझी के बयान को खारिज करते हुए कुमार के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच माझी के इस स्पष्टीकरण के समय पर सवाल उठाए।

बीजद प्रवक्ता लेनिन मोहंती ने पत्रकारों से कहा, “हम एसआईआर का विरोध नहीं कर रहे हैं बल्कि उस तरीके का विरोध कर रहे हैं जिसके तहत इसे राजनीतिक रूप से इस्तेमाल करते हुए वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाए गए। मतदाता सूची से 27.50 लाख नाम हटा दिए गए हैं जो पहले हुए एसआईआर के दौरान कभी नहीं हुआ था।”

ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भक्त चरण दास, जो सीईसी के खिलाफ विपक्ष के विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली में हैं, ने एक बयान में कहा: “मतदाता सूची में सुनियोजित तरीके से हेरफेर को सही ठहराने की मुख्यमंत्री की कोशिश, सत्ताधारी भाजपा के गहरे डर और लोकतांत्रिक तरीके से सत्ता में बने रहने के लिए प्रशासन के गलत इस्तेमाल पर उसकी निर्भरता को उजागर करती है। मैं मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की बचाव वाली टिप्पणियों को पूरी तरह खारिज करता हूं।”

ओडिशा भाजपा अध्यक्ष मनमोहन सामल ने कहा कि कांग्रेस शासन के दौरान आठ बार एसआईआर कराया गया था।

सामल ने कहा, “लेकिन भाजपा शासन में पहली बार एसआईआर कराए जाने पर इतना हंगामा क्यों हो रहा है? मतदाता की मृत्यु होने या दूसरी जगह चले जाने के कारण मतदाता सूची से कुछ नाम हटना स्वाभाविक है। एसआईआर का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाना है और यही किया जा रहा है।”

भाषा प्रचेता प्रशांत

प्रशांत