नयी दिल्ली, 12 अक्टूबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने वन्यजीव और संरक्षित क्षेत्रों में जंगली, आवारा और पालतू कुत्तों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र को निर्धारित समयसीमा के भीतर उचित दिशानिर्देश बनाने के निर्देश से संबंधित याचिका पर सुनवाई को लेकर सोमवार को सहमति जताई।
याचिका में कहा गया है कि खुले में घूमने वाले कुत्ते और जंगली कुत्ते भारत के स्थानीय वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं। इनमें वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची एक के तहत वर्गीकृत कुछ प्रजातियां भी शामिल हैं, जैसे हिम तेंदुआ, चिंकारा, ग्रेट इंडियन बस्टर्ड और ओलिव रिडले कछुआ।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह की पीठ ने याचिका पर केंद्र, राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड और भारतीय पशु कल्याण बोर्ड को नोटिस जारी किए।
याचिकाकर्ताओं (बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (बीएनएचएस) और अन्य) की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार ने पीठ को बताया कि लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश में हिम तेंदुओं तथा राजस्थान में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (गोडावण) जैसी संकटग्रस्त प्रजातियों पर हमले हो रहे हैं।
पीठ ने कहा कि वह याचिका की जांच करेगी और मामले को सुनवाई के लिए 17 नवंबर की तारीख तय की।
अधिवक्ता मधुस्मिता बोरा के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया है कि प्रतिवादियों को वन्यजीव और संरक्षित क्षेत्रों में जंगली, खुले में घूमने वाले और पालतू कुत्तों को नियंत्रित करने के लिए उचित दिशानिर्देश बनाकर निर्धारित समयसीमा के भीतर अदालत में पेश करने चाहिए।
भाषा शुभम आशीष
आशीष