नयी दिल्ली, 12 अक्टूबर (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी के एक निजी अस्पताल में केन्या के 38 वर्षीय मरीज के फेफड़े के दुर्लभ कैंसर का विशेष ‘डबल-स्लीव लोबेक्टॉमी’ तकनीक से सफलतापूर्व ऑपरेशन किया गया।
साकेत स्थित मैक्स स्मार्ट सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल ने सोमवार को एक बयान में बताया कि विशेष ‘डबल-स्लीव लोबेक्टॉमी’ के जरिए मरीज का प्रभावित पूरा फेफड़ा निकालने की जरूरत नहीं पड़ी।
डॉक्टरों ने बताया कि इस तकनीक से ट्यूमर के साथ सांस की मुख्य नली और एक प्रमुख रक्त वाहिका के प्रभावित हिस्सों को निकालकर उनका पुनर्निर्माण किया गया तथा फेफड़े के निचले हिस्से को सुरक्षित रखा।
अस्पताल ने बताया कि केन्या के इस मरीज को ‘सिस्टिक कार्सिनोमा’ नामक दुर्लभ कैंसर था और उनके बाएं फेफड़े के ऊपरी हिस्से में गहराई तक मौजूद ट्यूमर सांस की मुख्य नली और फेफड़े को रक्त पहुंचाने वाली एक प्रमुख रक्त वाहिका तक फैल गया था। उन्हें लंबे समय से छाती के बाईं ओर दर्द था और कभी-कभी खांसी के साथ खून भी आता था।
बयान के मुताबिक, अस्पताल में जांच के दौरान ट्यूमर की जटिल स्थिति का पता चला और सामान्य सर्जरी में पूरा बायां फेफड़ा निकालना पड़ सकता था, जिससे मरीज की सांस लेने की क्षमता काफी कम हो सकती थी।
अस्पताल ने बताया कि फेफड़े के स्वस्थ हिस्से को बचाने के लिए अस्पताल में थोरैसिक सर्जरी एवं लंग ट्रांसप्लांट विभाग के एसोसिएट निदेशक डॉ. कामरान अली के नेतृत्व में ‘डबल-स्लीव लोबेक्टॉमी’ तकनीक से ऑपरेशन किया गया और इस दौरान प्रभावित ऊपरी हिस्से को सांस की नली और रक्त वाहिका के संबंधित हिस्सों के साथ निकाला गया।
डॉक्टर अली ने बताया कि इसके बाद दोनों संरचनाओं को दोबारा जोड़ा गया, ताकि फेफड़े के शेष निचले हिस्से तक हवा और रक्त का प्रवाह बहाल हो सके।
अस्पताल ने बताया कि यह ऑपरेशन करीब सात घंटे चला और मरीज को सर्जरी के पांच दिन के भीतर अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
भाषा नोमान प्रशांत
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