लखनऊ, 12 अक्टूबर (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने प्रदेश के चार मेडिकल कॉलेजों में अनुसूचित जाति के अभ्यर्थियों को निर्धारित सीमा से अधिक आरक्षण देकर प्रवेश देने के मामले में राज्य सरकार के रुख पर कड़ी नाराजगी जताई है।
पीठ ने समाज कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव को संबंधित अभिलेखों के साथ मंगलवार को तलब किया है।
न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की पीठ ने यह आदेश राज्य सरकार की ओर से दाखिल एक विशेष अपील पर पारित किया है।
पीठ ने कहा कि राज्य सरकार ने पिछले वर्ष आश्वासन दिया था कि शैक्षिक सत्र 2026-27 से चार मेडिकल कॉलेजों अंबेडकर नगर, कन्नौज, सहारनपुर और जालौन में प्रवेश के लिए आरक्षण अधिनियम, 2006 के प्रावधानों का पालन किया जाएगा। इसके बावजूद मौजूदा सत्र में आरक्षण की निर्धारित सीमा से अधिक प्रवेश दिए जाने की बात सामने आई है।
अधिनियम के तहत अनुसूचित जाति के लिए 21 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति के लिए दो प्रतिशत और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण निर्धारित है। इस प्रकार कुल आरक्षण 50 प्रतिशत है।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि समाज कल्याण विभाग पहले दिए गए आश्वासन से सहमत नहीं था। इस पर पीठ ने सवाल उठाया कि यदि विभागों के बीच मतभेद था तो सरकार ने अदालत को इसकी जानकारी क्यों नहीं दी और पिछले सत्र में अदालत के आदेश का लाभ क्यों उठाया।
पीठ ने कहा कि राज्य सरकार एक इकाई है और उसके विभिन्न विभागों के अलग-अलग रुख के कारण न्यायालय के आदेशों की अवहेलना नहीं की जा सकती।
अदालत ने संबंधित मामले के पुराने अभिलेख भी प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होगी।
भाषा सं आनन्द सुरभि
सुरभि