नयी दिल्ली, 12 अक्टूबर (भाषा) प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने दिल्ली में पिछले कुछ दिनों से मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों और इसके चलते लगाई गई पाबंदियों के बारे में पूछे जाने पर सोमवार को कहा, ‘‘यह कानून और व्यवस्था का मुद्दा है। यह मेरा विषय नहीं है।’’
हालांकि, प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि 'उच्चतम न्यायालय के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं', चाहे वह आम नागरिक हो या कोई जनप्रतिनिधि। उन्होंने यह टिप्पणी इस सवाल के जवाब में की कि विपक्ष के नेता अपनी शिकायतें कैसे रख सकते हैं, जबकि उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मुलाकात करने से इनकार कर दिया है।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत यहां विज्ञान भवन में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के 33वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम से इतर संवाददाताओं से बातचीत कर रहे थे।
इसके कुछ घंटे बाद विपक्षी दलों के सांसदों और नेताओं ने सैकड़ों समर्थकों और कार्यकर्ताओं के साथ उच्चतम न्यायालय तक मार्च निकाला तथा 'वोट चोरी' के आरोप और सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक याचिका दायर की।
खरगे और राहुल ने 10 अक्टूबर को प्रधान न्यायाधीश को पत्र लिखकर 12 अक्टूबर को शाम चार से पांच बजे के बीच मुलाकात का समय मांगा था। वे एक ज्ञापन सौंपना चाहते थे, जिसमें 'वोट चोरी' पर लगाम लगाने, सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) रोकने और वापस मत पत्र व्यवस्था अपनाने की मांग की गई थी।
हालांकि, न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने उनसे मिलने से इनकार कर दिया।
मुलाकात से इनकार करने की वजह पूछे जाने पर सीजेआई ने कहा कि उन्होंने पत्र के जवाब में कुछ कारण बताए हैं और स्पष्ट किया है कि वह मुलाकात नहीं कर पाएंगे।
यह पूछे जाने पर कि उनमें से कई सांसद अपनी शिकायतें उठा रहे हैं और उन्हें अपनी बात कैसे रखनी चाहिए, सीजेआई ने कहा, 'उच्चतम न्यायालय के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं।'
उन्होंने कहा, ‘‘कोई भी याचिका... कोई भी व्यक्ति —चाहे वह आम नागरिक हो या जनप्रतिनिधि— भारत के हर नागरिक को हम तक पहुंचने का अधिकार है। हम कानून के मुताबिक मुद्दों पर सुनवाई करेंगे और लोगों को जो भी अधिकार मिलने चाहिए, उन्हें वे अधिकार देंगे।’’
पिछले कुछ दिनों में दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन हुए हैं। सप्ताहांत में राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए। यहां बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई, 10 अक्टूबर को 45 मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए गए और शहर के सीमावर्ती इलाकों में सघन जांच की गई।
कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेताओं और पूर्व मुख्यमंत्रियों सहित हजारों लोगों को हिरासत में लिया गया।
प्रदर्शनों और आवाजाही पर पाबंदियों के बारे में पूछे जाने पर प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘यह कानून और व्यवस्था का मुद्दा है। यह मेरा विषय नहीं है।’’
उच्चतम न्यायालय तक विपक्ष के मार्च के बारे में पूछे जाने पर सीजेआई ने कहा, ‘‘मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा।’’
खरगे और राहुल के उन्हें पत्र लिखने के बारे में पूछे जाने पर प्रधान न्यायाधीश ने कहा, 'मुझे कल एक पत्र मिला था और मैंने उसका जवाब दे दिया है। पत्र परसों का था, लेकिन मैं बाहर था।'
उन्होंने पत्र की विषयवस्तु बताने से इनकार करते हुए कहा, ‘‘आप पत्र की विषयवस्तु के बारे में उनसे पूछिए। मैंने इसकी गोपनीयता बनाए रखी है।’’
कांग्रेस ने न्यायमूर्ति सूर्यकांत की ओर से जवाब में भेजा गया पत्र सोमवार को सोशल मीडिया पर साझा किया।
पत्र में सीजेआई ने सोमवार को बैठक करने से इनकार कर दिया और राहुल एवं खरगे से कहा कि लंबित मामलों पर चर्चा करना उचित नहीं होगा। उन्होंने कांग्रेस नेताओं से अदालत में अर्जी दाखिल करने या ऑनलाइन याचिका दायर करने का आग्रह किया।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने पत्र में कहा, 'लंबित मामलों पर चर्चा के लिए बैठक बुलाना 'शक्तियों के बंटवारे' के सिद्धांत का पूरी तरह से उल्लंघन होगा - जो भारतीय संविधान के 'मूल ढांचे' के सिद्धांत का एक अहम हिस्सा है - और यह स्थापित नैतिकता और न्यायिक मर्यादा के भी खिलाफ होगा।'
सीजेआई से यह भी पूछा गया कि शीर्ष अदालत ने एक साथ चुनाव कराने के मुद्दे पर संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के साथ बैठक क्यों नहीं की।
जवाब में उन्होंने कहा, 'इस मामले में और भी आधार हैं। मैंने इस पर एक से ज्यादा आधार बताए हैं। मैंने कहा था कि हितों के टकराव की संभावना है और यह मामला भविष्य में अदालत तक पहुंच सकता है। इसलिए मेरी और मेरे सहयोगियों की यही राय थी कि हमें हितों के किसी भी टकराव से बचना चाहिए।'
एक साथ चुनाव कराने से संबंधित जेपीसी के अध्यक्ष पीपी चौधरी ने हाल ही में कहा था कि शीर्ष अदालत ने शुरू में न्यायाधीशों के साथ बैठक के अनुरोध पर समिति के साथ एक 'अनौपचारिक बातचीत' तय की थी, लेकिन बाद में इसे रद्द कर दिया, क्योंकि उसे लगा कि यह 'उचित नहीं' है।
भाषा पारुल सुरेश
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