द हेग, 12 अक्टूबर (एपी) दक्षिण अफ्रीका में जन्मीं न्यायविद् एवं नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नवी पिल्लई ने सोमवार को कहा कि एक न्यायाधीश होने के नाते उन्हें पुरस्कार मिलने की खबर पर विश्वास करने से पहले उसके प्रमाण देखने जरूरी थे।
उन्हें पिछले सप्ताह पुरस्कार देने की घोषणा की गई थी।
पिल्लई (85) ने एसोसिएटेड प्रेस (एपी) को दिए एक साक्षात्कार में कहा, ‘‘मुझे लिखित में पत्र मिला। इसलिए अब मैंने इसे खुद पढ़ लिया है और यह सच है।’’
पिल्लई को ऐसे समय में अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने के लिए यह पुरस्कार दिया गया है, जब इस व्यवस्था पर हमले हो रहे हैं।
पिल्लई के करियर में जेल में बंद नेल्सन मंडेला के अधिकारों की पैरवी करने से लेकर गाजा में इजराइल के नरसंहार करने का निष्कर्ष निकालने वाले पैनल का नेतृत्व करने तक की भूमिका शामिल रही है।
वह तीन अंतरराष्ट्रीय अदालतों में न्यायाधीश के रूप में भी काम कर चुकी हैं। पिल्लई ने कहा, ‘‘इस तरह के काम के लिए सम्मानित किया जाना बहुत बड़ी बात है। यह सम्मान सिर्फ मेरे लिए ही नहीं, बल्कि मेरे सभी सहकर्मियों के लिए भी है।’’
पुरस्कार की शुरुआत की 125वीं वर्षगांठ पर नॉर्वे की नोबेल समिति ने दुनिया को यह याद दिलाने का प्रयास किया कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानून का शासन उस व्यवस्था का आधार है, जिसे शांति सुनिश्चित करने और संघर्षों का अहिंसक तरीके से समाधान करने के लिए बनाया गया है।
समिति के अध्यक्ष योर्गेन वाटने फ्राइडनेस ने कहा, ‘‘शांति के लिए न्याय जरूरी है।’’
पिल्लई को यह पुरस्कार मिलना अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है।
दोनों नेताओं ने गाजा पर पिल्लई के नेतृत्व वाले संयुक्त राष्ट्र आयोग के निष्कर्षों को खारिज किया था।
दोनों नेता अंतरराष्ट्रीय न्यायालय और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय की भी कड़ी आलोचना करते रहे हैं।
पिल्लई इन दोनों अदालतों में न्यायाधीश रह चुकी हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं इस महत्वपूर्ण विषय पर चयन समिति के ध्यान केंद्रित करने को महत्व देती हूं, क्योंकि अगर कानून के शासन का सम्मान नहीं किया जाता है, तो इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ता है।’’
पिल्लई ने ट्रंप की कड़ी आलोचना करते हुए अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय के खिलाफ वाशिंगटन के कदमों को ‘‘पूरी तरह गैरकानूनी’’ और ‘‘नकारात्मक एवं क्रूर’’ बताया।
ट्रंप कई वर्षों से नोबेल शांति पुरस्कार पाने की इच्छा जताते रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘देशों के नेताओं की यह विशेष जिम्मेदारी है कि वे इन सिद्धांतों को स्पष्ट रूप से सामने रखें कि आप (घरेलू) कानून और अंतरराष्ट्रीय कानून, दोनों का सम्मान करें।’’
एपी जितेंद्र सुरेश
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