नयी दिल्ली, 12 अक्टूबर (भाषा) भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन ने सोमवार को जंतर मंतर को प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल के रूप में अधिसूचित करने संबंधी व्यवस्था समाप्त किए जाने की निंदा की और कहा कि इसे बंद करने से ‘‘वोट चोरी और बड़े पैमाने पर मताधिकार से वंचित किए जाने’’ के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों को दबाया नहीं जा सकेगा।
भाकपा (माले) लिबरेशन की केंद्रीय समिति ने एक बयान में आरोप लगाया कि केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार राष्ट्रीय राजधानी में लोकतांत्रिक विरोध-प्रदर्शनों के लिए उपलब्ध स्थानों को व्यवस्थित तरीके से सीमित कर रही है।
पार्टी ने कहा कि जंतर मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचना से बाहर करने का कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों, कार्यकर्ताओं और आम लोगों पर पुलिस कार्रवाई की गई है।
बयान में कहा गया कि प्रदर्शनकारी मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को रद्द करने की मांग कर रहे थे। पार्टी ने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया के कारण ‘‘करोड़ों नागरिक मताधिकार से वंचित हुए हैं।’’
उसने इन पाबंदियों को लोगों की लोकतांत्रिक आकांक्षाओं और संघर्षों पर हमला करार दिया।
पार्टी ने दावा किया कि पिछले कुछ दिनों में पुलिस का सामना करने वाले प्रदर्शनकारियों ने यह दिखाया है कि अवरोधक लगाने और बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लेने से उनके संकल्प को नहीं तोड़ा जा सकता।
भाकपा (माले) लिबरेशन ने कहा, ‘‘जंतर मंतर बंद करेंगे तो हर जगह हजारों जंतर मंतर तैयार होंगे।’’
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