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गन्ना किसानों की शिकायतों के समाधान के लिए एक सप्ताह में उच्चस्तरीय समिति गठित करेगा केंद्र

नयी दिल्ली, 12 अक्टूबर (भाषा) केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र और कर्नाटक के गन्ना किसानों की शिकायतों के समाधान के लिए एक सप्ताह के भीतर उच्चस्तरीय संयुक्त समिति गठित करने का सोमवार को फैसला किया। यह फैसला राष्ट्रीय राजधानी में दो केंद्रीय मंत्रियों और किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच करीब तीन घंटे तक चली बातचीत के बाद लिया गया।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और खाद्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने पूसा परिसर में गन्ना उत्पादक इन दोनों प्रमुख राज्यों के किसानों के प्रतिनिधिमंडल के साथ विस्तृत चर्चा की। बैठक में विभिन्न संगठनों के करीब 80 से 90 किसान और राज्य सरकारों के मंत्री भी शामिल हुए।

एक अक्टूबर से शुरू हुए 2026-27 के चीनी सत्र में चीनी मिलों में गन्ने की पेराई शुरू हुई है। इस बीच, किसानों ने उत्पादन लागत बढ़ने का हवाला देते हुए गन्ने का समर्थन मूल्य बढ़ाने की मांग की है। उन्होंने चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) भी 31 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़ाकर 50 रुपये प्रति किलोग्राम करने की मांग की है।

बैठक के बाद जारी एक बयान में चौहान ने कहा कि चर्चा के दौरान जमीनी स्तर से जुड़े मुद्दों पर विचार किया गया। इनमें मिलों की ओर से बताई गई चीनी प्राप्ति (रिकवरी) दर के आंकड़ों में विसंगतियां, वजन, बर्बादी, प्रयोगशाला में जांच और फसल बीमा जैसे मुद्दे शामिल हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘अन्नदाता किसानों का किसी भी परिस्थिति में शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।’’ चौहान ने मिलों की ओर से रिकवरी दर में विसंगतियों, वजन में कटौती और वास्तविक रिकवरी के आंकड़े छिपाने को बेहद संवेदनशील मुद्दे बताया।

उन्होंने कहा कि तत्काल या टुकड़ों में समाधान तलाशने के बजाय एक पारदर्शी और वैज्ञानिक व्यवस्था स्थापित करना जरूरी है, ताकि भविष्य में कोई भी मिल किसानों के अधिकारों का उल्लंघन न कर सके।

सरकारी बयान के अनुसार, मंत्रियों ने एक सप्ताह के भीतर एक विशेष उच्चस्तरीय संयुक्त समिति गठित करने की घोषणा की।

इस समिति में केंद्र सरकार, कर्नाटक और महाराष्ट्र सरकारों, किसान संगठनों तथा चीनी मिलों के प्रतिनिधियों के अलावा संबंधित विषयों के विशेषज्ञ और वैज्ञानिक शामिल होंगे।

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय