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कावेरी विवाद: कर्नाटक ने न्यायालय से कहा, पानी की कमी के चलते तमिलनाडु की मांग पूरी करना मुश्किल

नयी दिल्ली, 12 अक्टूबर (भाषा) कर्नाटक सरकार ने सोमवार को उच्चतम न्यायालय से कहा कि इस साल बारिश कम हुई है और राज्य के कई इलाकों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है, ऐसे में कावेरी नदी से 11 हजार टीएमसी फुट पानी छोड़ने की तमिलनाडु की मांग को पूरा करना मुश्किल होगा।

दूसरी ओर, तमिलनाडु सरकार ने कहा कि वह मुश्किल समय में उपलब्ध पानी में से अपना वाजिब हिस्सा और बकाया पानी ही मांग रही है तथा मौसम की बेरुखी और पानी की कमी का पूरा बोझ निचले प्रवाह वाले राज्य पर नहीं डाला जा सकता, जबकि कर्नाटक सिंचाई और दूसरी जरूरतों के लिए उपलब्ध पानी और आने वाले पानी का इस्तेमाल जारी रखे हुए है।

न्यायामूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति आपरेश कुमार सिंह की पीठ ने तमिलनाडु सरकार की नयी याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया, जिसमें कर्नाटक सरकार को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया था कि वह कावेरी नदी का तमिलनाडु के हिस्से का सात अक्टूबर तक बकाया 11 टीएमसी पानी तुरंत छोड़े और यह सुनिश्चित करे कि कर्नाटक-तमिलनाडु सीमा पर नदी के किनारे बने पानी मापने वाले मुख्य स्टेशन बिलिगुंडुलु में 10 दिन तक हर दिन 1.3 टीएमसी पानी की आपूर्ति की जाए।

कर्नाटक सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने पीठ को बताया कि यह साल बहुत मुश्किल रहा है और कई इलाकों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘हमें पानी बचाने पर ध्यान देना होगा, ताकि रिहायशी इलाकों में पेयजल की आपूर्ति पर असर न पड़े।’’

दीवान ने दलील दी कि तमिलनाडु को नवंबर में उत्तर-पूर्व मानसून का फायदा मिलता है, जिससे उसके जलाशय भर जाते हैं, जबकि कर्नाटक को इससे कोई मदद नहीं हासिल होगी।

उन्होंने कहा, ‘‘हर मुश्किल साल में यही समस्या रही है।’’

दीवान ने कहा कि कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) ने आठ अक्टूबर को हुई अपनी 59वीं बैठक में इस मामले पर अच्छी तरह से विचार किया और कर्नाटक को निर्देश दिया कि वह नौ अक्टूबर से अगले 15 दिन तक बिलिगुंडुलु में कावेरी का 3,000 क्यूसेक पानी छोड़े।

तमिलनाडु सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि कर्नाटक को बकाया पानी को आनुपातिक आधार पर पूरा करने का निर्देश दिया जाना चाहिए, वरना इस साल तमिलनाडु में फसलों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।

पीठ ने पूछा कि जब इस साल बारिश कम हुई है और दोनों राज्य प्रभावित हुए हैं, तो बकाया पानी की समस्या को कैसे दूर किया जा सकता है।

न्यायमूर्ति नाथ ने कहा, ‘‘अगर यह साल सामान्य बारिश वाला होता, तो हालात कुछ और होते।’’

रोहतगी ने कहा कि तमिलनाडु में किसान मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं, इसलिए इस मामले में एक और साल तक इंतजार नहीं किया जा सकता। उन्होंने शीर्ष अदालत से कम से कम कोई अंतरिम व्यवस्था करने का आग्रह किया।

स्थायी अधिवक्ता बी करुणाकरन के माध्यम से दायर याचिका में तमिलनाडु सरकार ने कहा कि 24 सितंबर को हुई बैठक में कावेरी जल विनियमन समिति (सीडब्ल्यूआरसी) ने कमी के प्रतिशत के आधार पर आकलन किया था।

समिति ने पाया था कि बिलिगुंडुलु में पानी का प्रवाह 52.935 टीएमसी होना चाहिए था, लेकिन वास्तविक जल प्रवाह निर्धारित मात्रा से कम रहा।

याचिका में कहा गया है, “उक्त कमी को स्वीकार करने के बावजूद सीडब्ल्यूआरसी ने कर्नाटक को बकाया पानी की भरपाई करने का निर्देश देने के संबंध में कोई निर्णय नहीं लिया। इसके बजाय, समिति ने पानी के प्रवाह की दर 6,000 क्यूसेक से घटाकर 4,000 क्यूसेक कर दी।”

तमिलाडु सरकार ने आंकड़े पेश करते हुए कहा कि इसके बावजूद कर्नाटक ने सीडब्ल्यूआरसी के निर्देशों का पालन नहीं किया और बिलिगुंडुलु में हर दिन 4,000 क्यूसेक पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने में विफल रहा।

उसने कहा कि इस मुश्किल साल में तमिलनाडु का हिस्सा आनुपातिक आधार पर तय किया जाना चाहिए, लेकिन सीडब्ल्यूएमए अपने गठन के आठ साल बाद भी 'डिस्ट्रेस फॉर्मूला' (पानी की कमी वाले वर्षों में पानी के बंटवारे का फॉर्मूला) बनाने में नाकाम रहा है—ऐसा फॉर्मूला जिसमें कोई अस्पष्टता न हो और किसी खास राज्य के साथ अन्याय न हो।

तमिलनाडु सरकार ने कहा कि सीडब्ल्यूएमए के निर्देश पर जो पानी छोड़ा जाना है — बिलिगुंडुलु में 24 सितंबर से अगले 15 दिन के लिए 4,000 क्यूसेक और नौ अक्टूबर से 3,000 क्यूसेक — वह बहुत कम है और इससे पहले से बकाया पानी का मुद्दा हल नहीं होता।

तमिलनाडु सरकार ने कहा कि सीडब्ल्यूआरसी ने आठ अक्टूबर को कर्नाटक को पानी की कमी पूरी करने का निर्देश देने के बारे में कोई फैसला नहीं लिया, बल्कि नौ अक्टूबर से पानी का बहाव 4,000 क्यूसेक से घटाकर 3,000 क्यूसेक करने का कदम उठाया।

उसने कर्नाटक सरकार को यह निर्देश देने का अनुरोध किया कि वह 24 सितंबर के सीडब्ल्यूएमए के फैसले को लागू करे और 24 सितंबर से सात अक्टूबर की अवधि के दौरान पानी की आपूर्ति न किए जाने से हुई 0.94 टीएमसी की कमी को पूरा करे, साथ ही आठ अक्टूबर की बैठक में सीडब्ल्यूएमए की ओर से दिए गए निर्देशों के अनुसार आगे भी पानी का बहाव सुनिश्चित करे।

भाषा पारुल नरेश

नरेश