मुंबई, 12 अक्टूबर (भाषा) मराठी सिनेमा की जानी मानी अभिनेत्री और लावणी कलाकार मधु कांबीकर का सोमवार को पुणे में निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमार थीं। उनके पारिवारिक मित्र ने यह जानकारी दी।
वह 72 वर्ष की थीं।
उनके पारिवारिक मित्र एवं निर्देशक महेश तिलेकर ने बताया, ‘‘वह कुछ वर्ष से बीमार थीं। आज पुणे में उनका निधन हो गया। 2016 में उन्हें पक्षाघात आया था जिससे उनके शरीर का एक हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया था, तब से वह बिस्तर पर ही थीं।’’
महाराष्ट्र में जन्मीं मधु कांबीकर ने कथक और लावणी का प्रशिक्षण लिया था। उन्होंने मराठी लोक रंगमंच में अपनी अलग पहचान बनाई।
उन्होंने ‘शापित’, ‘एक होता विदूषक’, ‘झपाटलेला’ और ‘यशवंत’ जैसी कई फिल्मों में अभिनय किया। फिल्म ‘यशवंत’ में उन्होंने दिवंगत अभिनेता नाना पाटेकर के साथ काम किया था।
उनका अंतिम संस्कार पुणे में किया गया। उनके परिवार में बेटा और बहू हैं।
महेश तिलेकर ने कहा कि मराठी सिनेमा और लोक रंगमंच विशेषकर लावणी के क्षेत्र में मधु कांबीकर के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा।
तिलेकर ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘मुझे याद है कि मैं उनसे दो बार मिलने गया था लेकिन वह मुझे या किसी और को पहचान नहीं पा रही थीं। उनके बेटे और बहू ने उनकी बहुत अच्छी देखभाल की।’’
तिलेकर ने कांबीकर के साथ अपने शो ‘मराठी तारका’ और कुछ टीवी विज्ञापनों में काम किया था।
जानी मानी मराठी अभिनेत्री लीला गांधी ने कहा कि कांबीकर के निधन से उन्हें बहुत दुख हुआ है।
गांधी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘मुझे आज सुबह उनके निधन के बारे में पता चला। वह पिछले कुछ साल से बीमार थीं। मैं उनसे करीब तीन-चार साल पहले मिली थी, लेकिन उसके बाद मुलाकात नहीं हो सकी। वह मेरी बेटी जैसी थीं। मुझे बहुत दुख है कि वह अब हमारे बीच नहीं हैं। वह बहुत अच्छी कलाकार थीं।’’
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि कांबीकर का निधन राज्य की कला और संस्कृति की दुनिया के लिए एक बड़ी क्षति है।
उन्होंने कांबीकर को एक ऐसी कलाकार बताया जिन्होंने महाराष्ट्र की लोक कला परंपराओं को गौरव के साथ रुपहले पर्दे तक पहुंचाया।
एक शोक संदेश में फडणवीस ने कहा कि उनकी कला की यात्रा लोक कला, रंगमंच और सिनेमा तक फैली हुई थी। उन्होने कथक के प्रशिक्षण से नृत्य के क्षेत्र में पहचान बनाई, वहीं महाराष्ट्र के पारंपरिक लोकनृत्य लावणी की शैली को भी संरक्षित रखा।
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘कांबीकर ने अपनी नृत्य शैली और प्रस्तुतियों से लावणी को गरिमा और विशिष्टता प्रदान की तथा सिनेमा के माध्यम से इस लोककला को और लोकप्रिय बनाया।’’
भाषा सुरभि नरेश
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