नयी दिल्ली, 12 अक्टूबर (भाषा) दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शनों का हवाला देते हुए सोमवार को कहा कि भारत के लोकतंत्र की साख को विपक्षी दलों की राजनीतिक सुविधा के लिए बंधक नहीं बनाया जा सकता।
निर्वाचन आयोग की संस्थागत शुचिता का बचाव करने वाले आईएएस, आईएफएस और संबद्ध सेवा से जुड़े 124 पूर्व अधिकारियों के एक खुले पत्र का हवाला देते हुए, गुप्ता ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का समर्थन किया और कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए सटीक मतदाता सूची, पारदर्शी प्रक्रियाओं और मजबूत संस्थानों की आवश्यकता होती है।
कांग्रेस सहित विपक्षी दल एसआईआर के जरिए मतदाता सूचियों से बड़े पैमाने पर वोट हटाए जाने और अन्य अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
दिल्ली में एसआईआर जारी है, और राष्ट्रीय राजधानी के 70 विधानसभा क्षेत्रों की प्रारूप मतदाता सूची से 47 लाख से अधिक नाम हटा दिए गए हैं।
दिल्ली की मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल प्रतिकूल जनादेश मिलने पर हर बार निर्वाचन आयोग पर सवाल नहीं उठा सकते।
उन्होंने कहा, 'लोकतंत्र के प्रति सम्मान चयनात्मक नहीं हो सकता। न ही इसके संस्थानों के प्रति सम्मान चयनात्मक हो सकता है।'
मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सहित ‘इंडिया’ गठबंधन के सदस्यों द्वारा कुमार को हटाने की मांग को लेकर उच्चतम न्यायालय तक मार्च निकाले जाने के बीच आई है।
इससे पहले, पूर्व सिविल सेवकों और राजनयिकों ने आयोग और एसआईआर प्रक्रिया का बचाव करते हुए कहा था कि कोई व्यवस्था किसी व्यक्ति के ‘जीतने’ या ‘हारने’ से सही या गलत नहीं हो जाती।
उन्होंने रेखांकित किया कि इसी आयोग के तहत केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना, झारखंड और जम्मू-कश्मीर के विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि इसने वर्ष 2024 के आम चुनाव के बाद लोकसभा में अपना बहुमत खो दिया।
पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले अधिकारियों में भारत सरकार के पूर्व सचिव, पूर्व राजदूत, पूर्व पुलिस महानिदेशक, राज्यों के पूर्व मुख्य सचिव और आयकर विभाग के पूर्व महानिदेशक शामिल हैं।
भाषा नोमान नोमान संतोष
संतोष
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