नयी दिल्ली, 12 अक्टूबर (भाषा) केंद्र और राज्यों के कर अधिकारियों से करदाताओं का दायरा बढ़ाने, नकद कर संग्रह में वृद्धि करने तथा कर चोरी करने वालों को पकड़ने के लिए खुफिया जानकारी और आंकड़ा विश्लेषण की अत्याधुनिक तकनीकी का उपयोग करने को कहा गया है। माल एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के नौ साल बाद इसकी दरों और प्रक्रियाओं के लगभग स्थिर होने के साथ ही यह कदम उठाया गया है। सूत्रों ने यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि कंपनियों से उपभोक्ता (बी2सी) के बीच लेनदेन के लिए इलेक्ट्रॉनिक बिल व्यवस्था एक अप्रैल, 2027 से लागू होगी। जीएसटी नेटवर्क (जीएसटीएन) राज्यों को इसे अपनाने के लिए आवश्यक तकनीकी सहायता उपलब्ध कराएगा। जीएसटी अधिकारी कंपनियों के लिए मददगार की भूमिका निभाएंगे और उन्हें बताएंगे कि कर विभाग के पास विस्तृत आंकड़े होने से जांच में किस तरह लाभ मिल सकता है।
सूत्रों ने बताया कि 57वीं जीएसटी परिषद की बैठक में मंजूर कुछ प्रक्रिया संबंधी सुधारों के लिए केवल नियमों में बदलाव की जरूरत है। इन्हें जल्द लागू किया जा सकता है।
पिछले साल जीएसटी दरों को तर्कसंगत बनाने के आर्थिक लाभ सामने आने के साथ ही अब कर अधिकारी करदाताओं पर अनिवार्य अनुपालन का दबाव डालने के बजाय उनके प्रति अधिक ‘सहयोगात्मक रुख’ अपनाएंगे, ताकि उनमें भरोसा कायम किया जा सके।
एक सूत्र ने कहा, ‘‘हमने जीएसटी अधिकारियों से नकद कर संग्रह बढ़ाने और जरूरत से ज्यादा दखल देने के बजाय आंकड़ों का विश्लेषण करने को कहा है। जीएसटी के तहत पंजीकृत करदाताओं की संख्या अच्छी है, लेकिन इसका दायरा बढ़ाने की गुंजाइश है। हमने राज्यों से भी कर आधार बढ़ाने को कहा है।’’
फिलहाल जीएसटी के तहत करीब 1.68 करोड़ करदाता पंजीकृत हैं।
केंद्र और राज्य के कर अधिकारी एक निर्धारित सूत्र के आधार पर करदाताओं का बंटवारा करते हैं। डेढ़ करोड़ रुपये से कम सालाना कारोबार वाले करदाताओं में से 90 प्रतिशत का जिम्मा राज्य जीएसटी प्रशासन के पास है। शेष 10 प्रतिशत करदाताओं का प्रबंधन केंद्रीय कर प्रशासन करता है।
डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक कारोबार वाले करदाताओं को केंद्र और राज्य के कर प्रशासन के बीच बराबर-बराबर बांटा गया है।
सूत्रों ने कहा कि राज्य के कर अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि नकद कर संग्रह बढ़े और कारोबारियों की उत्पादन कर देनदारी उनके इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के दावों के बराबर न हो।
एक सूत्र ने आयकर विभाग के ‘नज’ (करदाताओं को स्वेच्छा से अनुपालन के लिए प्रोत्साहित करने की पहल) अभियान का उदाहरण देते हुए कहा, ‘‘हमें अपनी प्रौद्योगिकी व्यवस्था मजबूत करने और बिना अनावश्यक दखल के काम करने का तरीका अपनाने की जरूरत है। हमें आंकड़ों के विश्लेषण में सुधार करना होगा, कमियों का पता लगाना होगा और करदाताओं तक अपनी पहुंच बढ़ानी होगी, ताकि उन्हें नियमों के अनुपालन के लाभ समझाए जा सकें।’’
सूत्रों ने कहा कि बी2सी इलेक्ट्रॉनिक बिल व्यवस्था से आपूर्ति श्रृंखला में आपूर्तिकर्ता से लेकर अंतिम खरीदार तक के लेनदेन के आंकड़े उपलब्ध हो सकेंगे।
फिलहाल पांच करोड़ रुपये के औसत सालाना कारोबार वाले कारोबारियों के लिए कंपनियों के बीच (बी2बी) बिक्री पर इलेक्ट्रॉनिक बिल तैयार करना अनिवार्य है।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता वाली और राज्यों के वित्त मंत्रियों वाली जीएसटी परिषद ने सितंबर, 2024 में बी2सी इलेक्ट्रॉनिक बिल व्यवस्था के प्रायोगिक परीक्षण की सिफारिश की थी।
सूत्रों ने बताया कि बी2सी इलेक्ट्रॉनिक बिल व्यवस्था एक अप्रैल, 2027 से स्वैच्छिक आधार पर लागू की जाएगी।
एक सूत्र ने कहा, ‘‘हम राज्यों को बी2सी इलेक्ट्रॉनिक बिल के लिए जीएसटीएन प्रणाली का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। कारोबारियों को हम बी2सी इलेक्ट्रॉनिक बिल के लाभ और कर जांच के अनुपालन पर इसके असर के बारे में बताएंगे। चूंकि कर अधिकारियों को बी2बी और बी2सी इलेक्ट्रॉनिक बिलों से विस्तृत आंकड़े मिलेंगे, इसलिए कर प्रशासन में कारोबारियों के साथ बेहतर व्यवहार किया जा सकेगा।’’
भाषा रमण अजय
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