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ग्राहकों को सीधे उत्पाद बेचने वाले उद्योग का कारोबार 23,522 करोड़ रुपये पर पहुंचा : रिपोर्ट

नयी दिल्ली, 12 अक्टूबर (भाषा) भारत में ग्राहकों को सीधे उत्पाद बेचने वाले (डायरेक्ट सेलिंग) उद्योग का कारोबार मार्च, 2025 में समाप्त वित्त वर्ष में सात प्रतिशत की सालाना दर से बढ़कर 23,522 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। सोमवार को जारी एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।

रिपोर्ट के अनुसार, अगले वित्त वर्ष तक इसके 25,000 करोड़ रुपये के पार जाने का अनुमान है।

एसोसिएशन ऑफ डायरेक्ट सेलिंग एंटिटीज ऑफ इंडिया (एडीएसईआई) ने शोध भागीदार कांतार के साथ मिलकर यह रिपोर्ट तैयार की है। रिपोर्ट के अनुसार, इस क्षेत्र में 91 लाख सक्रिय विक्रेता हैं, जिनमें 47 प्रतिशत महिलाएं हैं। यह क्षेत्र स्वरोजगार और अतिरिक्त आय का एक साधन है।

रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के 15 सबसे बड़े प्रत्यक्ष बिक्री बाजारों में भारत 11वें स्थान पर है। यह उद्योग उद्यमिता, प्रशिक्षण और नियामकीय नियमों के बेहतर अनुपालन के जरिये अपनी पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।

एडीएसईआई के अध्यक्ष संजीव कुमार ने कहा, ''यह रिपोर्ट विश्वसनीय आंकड़ों और गुणात्मक जानकारी के जरिये भारत में ग्राहकों को उत्पाद सीधे बेचने वाले उद्योग के वास्तविक योगदान को सामने लाती है। इसके केंद्र में 91 लाख से अधिक लोगों की आजीविका है, जिनमें करीब आधी महिलाएं हैं। यह उद्यमिता की भावना पर आधारित है। पिछले एक दशक में यह उद्योग सरकार के स्वरोजगार, कौशल विकास और महिलाओं के नेतृत्व में विकास को बढ़ावा देने के दृष्टिकोण के अनुरूप रहा है। एडीएसईआई नियमों के अनुपालन और उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ाने के लिए सरकार के साथ मिलकर काम करता रहेगा।''

रिपोर्ट के अनुसार, उद्योग के सक्रिय विक्रेताओं में करीब 43 लाख महिलाएं हैं। काम के समय में लचीलापन, कारोबार शुरू करने के लिए अपेक्षाकृत कम पूंजी की जरूरत और औपचारिक शैक्षणिक योग्यता की अनिवार्यता नहीं होने से ग्रामीण तथा छोटे शहरों में रहने वाली महिलाओं के लिए यह काम स्वतंत्र रूप से आय अर्जित करने का एक जरिया बन सकता है।

भाषा योगेश अजय

अजय