नयी दिल्ली, 12 अक्टूबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने भाजपा सांसद कंगना रनौत की कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के जरिये निर्मित फर्जी और अश्लील सामग्री को डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाने का आदेश दिया है।
उच्च न्यायालय ने प्रतिवादियों को अभिनेत्री कंगना रनौत की अनुमति के बिना उनके नाम, तस्वीर, शक्ल-सूरत, आवाज, भाषणों, व्यक्तित्व और इससे जुड़ी अन्य विशेषताओं का इस्तेमाल करने से भी रोक दिया।
न्यायमूर्ति विकास महाजन ने आठ अक्टूबर को जारी एक आदेश में कहा, ‘‘मेटा को निर्देश दिया जाता है कि वह वादी द्वारा बताई गई विवादित सामग्री को अपने प्लेटफॉर्म से हटाए, उस तक पहुंच बंद करे और उसे हमेशा के लिए हटा दे। इसमें वे वीडियो, रील, पोस्ट, अकाउंट या चैनल भी शामिल हैं, जो गैर-कानूनी तरीके से वादी के व्यक्तित्व का इस्तेमाल या नकल करते हैं।’’
उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई इस आदेश की प्रति मिलने के 72 घंटों के भीतर की जाए।
आदेश में कहा गया है कि दो हफ्ते के अंदर अनुपालन हलफनामा दाखिल किया जाए।
अदालत ने यह अंतरिम आदेश अभिनेत्री कंगना रनौत द्वारा अपने व्यक्तित्व अधिकारों के संरक्षण की मांग को लेकर दायर वाद के तहत पारित किया।
रनौत के वकील ने यौन और अश्लील सामग्री, फेक न्यूज, और एआई से निर्मित ऐसी सामग्री पर आपत्ति जताई है, जिसमें कुछ बयानों को भाजपा सांसद का बताया गया है।
वकील ने कहा कि हालांकि ‘मीम’ समेत आपत्तिजनक व्यंग्यात्मक सामग्री भी मौजूद है, लेकिन वे इस समय उनके खिलाफ अंतरिम राहत का अनुरोध नहीं कर रहे हैं।
अदालत ने अपने आदेश में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और दूरसंचार विभाग को यह निर्देश भी दिया कि वे इंटरनेट और दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को जरूरी निर्देश जारी करें, ताकि पहचान की गई कॉपीराइट का उल्लंघन करने वाली वेबसाइट तक पहुंच को दो हफ़्ते के भीतर ब्लॉक किया जा सके।
उच्च न्यायालय ने कहा कि रनौत की प्रतिष्ठा उन्हें स्वाभाविक रूप से अपने व्यक्तित्व पर मालिकाना हक देता है। इसमें वाणिज्यिक मकसद के लिए उनका इस्तेमाल करने और अनधिकृत इस्तेमाल या गलत इस्तेमाल किए जाने से संरक्षण का खास अधिकार भी शामिल है।
अदालत ने कहा कि इसमें वादी को ऐसी आपत्तिजनक सामग्री से संरक्षण भी शामिल है, जो एआई निर्मित, या छेड़छाड़ की गई, और अश्लील डीपफेक हैं।
उच्च न्यायालय ने कहा कि अगर इस आदेश के तहत किसी ऐसी वेबसाइट या सोशल मीडिया अकाउंट को ब्लॉक या लॉक किया जाता है, जो प्राथमिक रूप से उल्लंघन करने वाली वेबसाइट नहीं है, तो वह वेबसाइट अदालत का रुख कर सकती है। इसके लिए उसे यह शपथपत्र देना होगा कि उसका मकसद अभिनेत्री के व्यक्तित्व अधिकारों का उल्लंघन करना नहीं है। इसके बाद, अदालत आदेश में संशोधन करने पर विचार करेगी।
ऐश्वर्या राय बच्चन, अभिषेक बच्चन और सलमान खान जैसे कलाकार, 'आर्ट ऑफ लिविंग' के संस्थापक श्री श्री रवि शंकर, पत्रकार सुधीर चौधरी, पॉडकास्टर राज शमानी, आंध्र प्रदेश के उप मुख्यमंत्री पवन कल्याण और क्रिकेटर अभिषेक शर्मा जैसी कई जानी-मानी हस्तियां पहले भी अपने व्यक्तित्व और ‘पब्लिसिटी’ अधिकारों की सुरक्षा के लिए उच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटा चुकी हैं।
उच्च न्यायालय ने उन्हें अंतरिम राहत दी थी।
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