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माकपा ने एसआईआर के खिलाफ संघर्ष तेज करने का संकल्प लिया, दिल्ली पुलिस की कार्रवाई की निंदा की

नयी दिल्ली, 12 अक्टूबर (भाषा) मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने सोमवार को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ अपना संघर्ष तेज करने का संकल्प लिया। पार्टी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, इस प्रक्रिया को वापस लेने और निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित कानून को रद्द करने की मांग की।

पार्टी ने यहां नौ और 11 अक्टूबर को हुई केंद्रीय समिति की बैठक के बाद जारी एक बयान में आरोप लगाया कि एसआईआर लोकतांत्रिक अधिकारों और मतदान के अधिकार के लिए खतरा है। बयान में निर्वाचन आयोग (ईसी) के कामकाज और उसकी स्वतंत्रता पर भी सवाल उठाए गये।

पार्टी ने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया पर 'द इंडियन एक्सप्रेस' में प्रकाशित एक खबर के बाद निर्वाचन आयोग की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा है। उसने आरोप लगाया कि केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ता वास्तविक मतदाताओं के नाम हटवाने के लिए बड़ी संख्या में फॉर्म-7 जमा कर रहे हैं। पार्टी ने निर्वाचन आयोग की सूचना प्रौद्योगिकी संरचना में बदलाव और फॉर्म-6 में कथित अवैध संशोधन पर भी चिंता जताई।

माकपा ने दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई की निंदा करते हुए आरोप लगाया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर की गई यह कार्रवाई हाल के समय की सबसे क्रूर कार्रवाइयों में से एक थी और इसने विरोध प्रदर्शन करने के संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन किया।

बयान में आरोप लगाया गया कि पुलिस ने 'हरकिशन सिंह सुरजीत भवन' में जबरन घुसने की कोशिश की, जहां केंद्रीय समिति की बैठक हो रही थी। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (कॉजपा) की प्रेस वार्ता के बाद पुलिस 'प्रेस क्लब ऑफ इंडिया' में घुस गई। पार्टी ने अपने नेताओं, सांसदों, महिला और छात्र प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार की भी निंदा की।

माकपा महासचिव एम. ए. बेबी ने कहा, 'आप बैरिकेड लगा सकते हैं, लेकिन लोगों की लोकतांत्रिक आकांक्षाओं को किसी भी क्रूर ताकत से नहीं दबाया जा सकता, चाहे वह पैलेट गन हो या बल प्रयोग।' उन्होंने जोर देकर कहा कि पार्टी विरोध प्रदर्शनों पर लगाई गई पाबंदियों के खिलाफ अपना संघर्ष जारी रखेगी।

माकपा ने कहा कि वह मतदान के अधिकारों, नागरिक स्वतंत्रता और संवैधानिक सिद्धांतों की रक्षा के लिए लोगों को एकजुट करने के वास्ते लोकतांत्रिक ताकतों के साथ मिलकर काम करेगी।

भाषा शुभम सुरेश

सुरेश