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तमिलनाडु: उपचुनाव नतीजे से अन्नाद्रमुक के वोट प्रतिशत में गिरावट, पार्टी में संकट गहराया

(जे वी शिव प्रसन्न कुमार)

चेन्नई, 12 अक्टूबर (भाषा) तमिलनाडु के मदुरांतकम और धारापुरम में हाल में हुए उपचुनावों के नतीजों से अन्नाद्रमुक को बड़ा झटका लगा है। इससे द्रविड़ पार्टी के पारंपरिक वोट आधार में भारी गिरावट आई है और उसके नेतृत्व, जमीनी रणनीति तथा इस राज्य के बदलते राजनीतिक परिदृश्य में उसकी स्थिति को लेकर संकट और गहरा गया है।

ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) के उम्मीदवारों ने अप्रैल में विधानसभा चुनाव जीता था, लेकिन बाद में इस्तीफा देकर सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) में शामिल हो गए। अन्नाद्रमुक को छह अक्टूबर को दोनों आरक्षित सीट पर हुए उपचुनाव में काफी कम वोट मिले और वह तीसरे स्थान पर रही।

पश्चिमी ‘कोंगु’ क्षेत्र में स्थित धारापुरम को लंबे समय से अन्नाद्रमुक और उसके महासचिव के. पलानीस्वामी का मजबूत गढ़ माना जाता था। यहां अप्रैल में हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी को 40.56 प्रतिशत वोट मिले थे, लेकिन उपचुनाव में उसका वोट प्रतिशत घटकर महज 25.08 प्रतिशत रह गया।

मदुरांतकम में भी ऐसा ही रुझान देखने को मिला जहां अन्नाद्रमुक के वोट प्रतिशत में 9.34 प्रतिशत की गिरावट आई, जिससे वह सत्तारूढ़ टीवीके और द्रमुक के बाद काफी पीछे तीसरे स्थान पर खिसक गई।

निर्वाचन आयोग के आंकड़े अप्रैल 2026 के विधानसभा चुनाव और अक्टूबर 2026 के उपचुनाव के बीच पार्टी के मतदाता आधार में आई भारी गिरावट को दर्शाते हैं। मदुरांतकम में अन्नाद्रमुक का वोट प्रतिशत अप्रैल के 34.95 प्रतिशत से घटकर 9.34 प्रतिशत रह गया, जबकि धारापुरम में यह अप्रैल के 40.56 प्रतिशत से गिरकर 15.48 प्रतिशत रह गया।

अन्नाद्रमुक की पारंपरिक प्रतिद्वंद्वी द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) ने अपने वोट प्रतिशत को काफी हद तक बरकरार रखा। धारापुरम में द्रमुक को लगभग 31.78 प्रतिशत और मदुरांतकम में 29.14 प्रतिशत वोट मिले और वह दूसरे स्थान पर रही। इसके बाद द्रमुक के नेता दावा कर रहे हैं कि राज्य में भविष्य की राजनीतिक लड़ाई केवल टीवीके और उनकी पार्टी के बीच होगी। इस तरह वे अन्नाद्रमुक को राज्य की राजनीति में अप्रासंगिक साबित करने की कोशिश कर रहे हैं।

विधानसभा चुनाव के बाद से ही अन्नाद्रमुक आंतरिक कलह से जूझ रही है। चुनाव के बाद विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव के दौरान उसके 25 विधायकों ने पार्टी से अलग रुख अपनाते हुए टीवीके सरकार का समर्थन किया था।

दोनों सीट वापस जीतने में नाकाम रहने और तीसरे स्थान पर खिसकने से पार्टी में नेतृत्व का संकट फिर गहरा सकता है और उसके और विधायकों के पाला बदलने का खतरा बढ़ सकता है।

भाषा आशीष सुरेश

सुरेश