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बिहार एसआईआर मामले की सुनवाई के दौरान नए फॉर्म-6 पर कोई फैसला नहीं सुनाया: शीर्ष अदालत

नयी दिल्ली, 12 अक्टूबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि उसने नए फॉर्म-6 को न तो स्वीकृति दी है और न ही खारिज किया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि बिहार में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान उसने इस मुद्दे पर कोई फैसला नहीं सुनाया था।

फॉर्म-6 वह आवेदन प्रपत्र है, जिसके जरिये कोई पात्र व्यक्ति मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने का अनुरोध करता है।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी मोहना की पीठ एसआईआर से संबंधित एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि निर्वाचन आयोग ने कहा था कि फॉर्म-6 को उच्चतम न्यायालय ने मंजूरी दी है।

उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत ने पांच अक्टूबर को कहा था कि उसने फॉर्म-6 में किसी भी संशोधन को मंजूरी नहीं दी थी। निर्वाचन आयोग विभिन्न राज्यों में एसआईआर के दौरान इस फॉर्म का इस्तेमाल कर रहा है।

इस पर न्यायमूर्ति बागची ने कहा, ‘‘नए फॉर्म-6 पर कोई न्यायिक फैसला नहीं दिया गया है।’’ उन्होंने कहा कि जब पीठ ने बिहार में एसआईआर से जुड़े मामले की सुनवाई की थी, तब नए फॉर्म-6 का मुद्दा सामने नहीं था।

न्यायमूर्ति बागची ने कहा, ‘‘प्रधान न्यायाधीश ने बस इतना कहा था कि जब बिहार में एसआईआर मामले पर हमने सुनवाई की थी, तो नए फॉर्म-6 का मुद्दा नहीं था।’’

उन्होंने कहा कि इसका मतलब है कि इसे शीर्ष अदालत ने न तो मंजूरी दी थी और न ही खारिज किया था।

पीठ ने कहा कि इस याचिका पर एसआईआर से संबंधित अन्य लंबित याचिकाओं के साथ 27 अक्टूबर को सुनवाई की जाएगी।

उच्चतम न्यायालय ने पांच अक्टूबर को एक अलग याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा था कि उसने विभिन्न राज्यों में मतदाता सूचियों के एसआईआर के दौरान निर्वाचन आयोग द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे फॉर्म-6 में किसी भी बदलाव को मंजूरी नहीं दी है।

निर्वाचन आयोग ने 26 सितंबर को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की थी, जिसमें संकेत दिया गया था कि शीर्ष अदालत ने बिहार में एसआईआर से संबंधित मई 2026 के फैसले में फॉर्म छह के घोषणा-पत्र को बरकरार रखा था।

पांच अक्टूबर को शीर्ष अदालत में सुनवाई के लिए आई याचिका में मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त अधिनियम, 2023 के प्रावधानों, विशेष रूप से धारा 18 का उल्लेख किया गया है। यह धारा निर्वाचन आयोग में निर्णय लेने की प्रक्रिया से संबंधित है और इसमें प्रावधान है कि मतभेद की स्थिति में बहुमत का निर्णय मान्य होगा।

याचिका में उठाए गए प्रमुख मुद्दों में मतदाता के रूप में मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म छह में बदलाव भी शामिल है। इसमें आरोप लगाया गया है कि पूर्वजों के विवरण और पिछले एसआईआर से संबंध की जानकारी देने की शर्त निर्वाचन आयोग के सॉफ्टवेयर के जरिये जोड़ी गई, जबकि चुनाव संबंधी नियमों के तहत इसके लिए आवश्यक वैधानिक संशोधन नहीं किया गया था।

भाषा Intern दिलीप

दिलीप