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आरबीआई के नकदी निकालने के कदमों से भारित औसत कॉल मनी दर बढ़ी: विशेषज्ञ

मुंबई, 12 अक्टूबर (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से पिछले सप्ताह बैंकिंग प्रणाली से अतिरिक्त नकदी निकालने के लिए घोषित उपायों से सोमवार को भारित औसत कॉल मनी दर 0.12 प्रतिशत बढ़ गई। विशेषज्ञों ने यह जानकारी दी।

विशेषज्ञों का कहना है कि नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) के दैनिक रखरखाव की न्यूनतम सीमा बढ़ाकर 99 प्रतिशत करने और खुले बाजार परिचालन (ओएमओ) के तहत बॉण्ड बेचने जैसे कदम नीतिगत दरों में बढ़ोतरी का असर तेजी से दिखने में भी मदद करेंगे।

क्लियरिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआईएल) के आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को भारित औसत कॉल मनी दर 5.43 प्रतिशत पर रही, जो नौ अक्टूबर को 5.31 प्रतिशत थी।

मुद्रा बाजार विशेषज्ञों ने बताया कि बैंकिंग प्रणाली में अत्यधिक नकदी होने से नीतिगत दरों में बढ़ोतरी का असर कमजोर पड़ सकता है, क्योंकि इससे बाजार उधारी पर बैंकों की निर्भरता घटती है और वे आसानी से उपलब्ध फंड के जरिये कर्ज की मांग पूरी कर लेते हैं।

जब बैंकों के पास पर्याप्त नकदी होती है, तो उन पर फंड जुटाने के लिए जमा दरें बढ़ाने का दबाव कम होता है, जिससे कर्जदारों के लिए ऋण दरों में बढ़ोतरी में देरी हो सकती है। अतिरिक्त नकदी अल्पकालिक मुद्रा बाजार दरों को भी नीचे बनाए रखती है, जिससे समग्र उधारी लागत पर नीतिगत दरों में वृद्धि का तत्काल प्रभाव सीमित हो जाता है।

चॉइस वेल्थ के उपाध्यक्ष माताप्रसाद पांडेय ने कहा, ''अत्यधिक नकदी के बीच नीतिगत दरों में वृद्धि मौद्रिक नीति के पारेषण को कमजोर कर सकती है। इसलिए आरबीआई के लिए दैनिक सीआरआर रखरखाव सीमा बढ़ाने और ओएमओ बिक्री जैसे कदमों के जरिये अतिरिक्त नकदी को निकालने तथा एक दिन की दरों को रेपो दर के करीब या उससे ऊपर लाना आवश्यक था, ताकि नीतिगत रुख का सही प्रभाव सुनिश्चित हो सके।''

भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के अर्थशास्त्रियों ने एक टिप्पणी में कहा कि आरबीआई के इस कदम से दैनिक फंड प्रबंधन में लचीलापन घटेगा, जबकि बैंक आमतौर पर आवश्यकता के 95 प्रतिशत से अधिक का सीआरआर संतुलन बनाए हुए हैं।

भाषा पाण्डेय योगेश

योगेश

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