नयी दिल्ली, 12 अक्टूबर (भाषा) भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने सोमवार को बताया कि अगले दो-तीन दिनों में दक्षिणी प्रायद्वीप में पूर्वोत्तर मानसून के दस्तक देने की अनुकूल परिस्थितियां बन रही हैं।
आईएमडी ने अपने दैनिक पूर्वानुमान में यह भी बताया कि दक्षिण-पश्चिम मानसून देश के शेष हिस्सों से लगातार लौट रहा है।
विभाग ने बताया कि पूर्वोत्तर मानसून के आगमन के कारण अगले पांच-छह दिनों के दौरान दक्षिणी प्रायद्वीप में लंबे समय तक बारिश होने की संभावना है।
आईएमडी के मुताबिक, ‘‘पंद्रह से 18 अक्टूबर के दौरान केरलम एवं माहे, तटीय और दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल तथा तटीय आंध्र प्रदेश में कुछ स्थानों पर भारी बारिश होने की संभावना है।’’
मौसम विभाग ने बताया कि कर्नाटक के उत्तर में 17 और 18 अक्टूबर को कुछ स्थानों पर भारी बारिश होने की संभावना है, जबकि रायलसीमा में 15 और 16 अक्टूबर को ऐसी ही स्थिति रह सकती है।
भारत में मानसून मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है। पहला दक्षिण-पश्चिम मानसून है, जो जून से सितंबर तक सक्रिय रहता है।
यह जून के आसपास दक्षिण-पश्चिमी तट पर स्थित केरलम में दस्तक देता है और फिर देशभर में आगे बढ़ता है।
दक्षिण-पश्चिम मानसून भारत को प्रभावित करने वाला प्रमुख मानसून है।
यह न केवल गर्मी से राहत देता है, बल्कि देश के पारिस्थितिकी तंत्र और अर्थव्यवस्था में भी योगदान देता है।
इसका खास महत्व खरीफ फसलों की खेती के लिए है।
दूसरा पूर्वोत्तर मानसून है, जिसे लौटता हुआ मानसून भी कहा जाता है। यह अक्टूबर से दिसंबर तक सक्रिय रहता है और प्रायद्वीपीय भारत को प्रभावित करता है।
यह दक्षिण-पश्चिम मानसून जितना तीव्र नहीं होता, लेकिन रबी फसलों की पैदावार के लिए महत्वपूर्ण है।
आईएमडी के अनुसार, इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान 759.4 मिलीमीटर बारिश हुई, जो 868.6 मिलीमीटर के सामान्य औसत से 12.6 प्रतिशत कम है।
भाषा जितेंद्र सुरेश
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