नयी दिल्ली, 12 अक्टूबर (भाषा) बिहार के गया, राजस्थान के नागौर और मध्य प्रदेश के उमरिया जिले को प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (पीएम-डीडीकेवाई) के पहले वर्ष में कृषि क्षेत्र में बदलाव लाने के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले आकांक्षी जिलों के रूप में मान्यता दी गई है।
इन तीनों जिलों का चयन योजना के तहत चुने गए 100 आकांक्षी जिलों में से किया गया है। इनका चयन फसल उत्पादकता में कमी, फसल सघनता कम होने और कृषि ऋण वितरण कम होने जैसे तीन संकेतकों के आधार पर किया गया था।
इसके अलावा, योजना के छह प्रमुख उद्देश्यों के तहत उत्कृष्ट कार्य के लिए 18 जिलों को सम्मानित किया गया। कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर, उत्तर प्रदेश के चित्रकूट और सिक्किम के ग्यालशिंग को चुना गया। फसल विविधीकरण और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश के महोबा, मध्य प्रदेश के डिंडोरी और उत्तराखंड के चमोली को मान्यता दी गई।
फसल कटाई के बाद भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ और सीधी तथा छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा को चुना गया। सिंचाई ढांचे के लिए जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़, गुजरात के दाहोड़ और छोटा उदयपुर को मान्यता दी गई। अल्पकालिक और दीर्घकालिक कृषि ऋण तक पहुंच बेहतर बनाने के लिए तेलंगाना के नारायणपेट, उत्तर प्रदेश के जालौन और आंध्र प्रदेश के श्री सत्य साईं जिले को चुना गया। वहीं, शासन और सेवाओं की आपूर्ति के क्षेत्र में तेलंगाना के नागरकुरनूल, गुजरात के कच्छ और कर्नाटक के हावेरी को सम्मानित किया गया।
अनुमानित 24,000 करोड़ रुपये के वार्षिक व्यय वाली इस योजना के तहत 11 मंत्रालयों और विभागों की 36 केंद्रीय योजनाओं को एकीकृत किया गया है। इसमें राज्य सरकारों की योजनाओं और निजी क्षेत्र की भागीदारी को भी शामिल किया गया है।
योजना के पहले वर्ष के पूरा होने के अवसर पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा, ''पहले वर्ष में मजबूत आधार तैयार करने पर ध्यान दिया गया, जबकि आने वाला साल जमीनी स्तर पर स्पष्ट और मापने योग्य परिणाम हासिल करने के लिए समर्पित होना चाहिए।''
उन्होंने उत्पादकता बढ़ाने, फसल सघनता में सुधार, सिंचाई और जल प्रबंधन को मजबूत करने, कृषि ऋण तक पहुंच आसान बनाने, उच्च मूल्य वाली कृषि को बढ़ावा देने, फसल कटाई के बाद के बुनियादी ढांचे में सुधार और किसानों की आय बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया।
चौहान ने कहा कि योजना की सफलता का अंतिम पैमाना यह होगा कि इससे किसानों के जीवन में कितना बदलाव आता है। उन्होंने सभी संबंधित पक्षों से समन्वय मजबूत करने, क्रियान्वयन में तेजी लाने और कृषि क्षेत्र के परिणामों तथा टिकाऊ कृषि आय में मापने योग्य सुधार पर ध्यान देने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा, ''आने वाले वर्ष में सफल पहल का विस्तार करने और सभी चिह्नित जिलों में परिणाम बेहतर बनाने पर ध्यान दिया जाएगा। इसका व्यापक लक्ष्य सभी 100 पीएम-डीडीकेवाई जिलों को वास्तव में 'धन-धान्य' यानी अनाज और समृद्धि से संपन्न बनाना है।''
केंद्रीय मंत्री ने जिला कार्ययोजनाओं को ठोस परिणामों में बदलने के लिए राज्य सरकारों, जिला प्रशासनों, वैज्ञानिक संस्थानों और किसानों के साथ मिलकर काम करने की केंद्र की प्रतिबद्धता दोहराई।
मंत्री ने 22 अक्टूबर से 30 नवंबर, 2026 तक सभी राज्यों में आयोजित होने वाले 'खेत बचाओ अभियान' का भी उल्लेख किया। इसका उद्देश्य उर्वरकों के संतुलित और विवेकपूर्ण इस्तेमाल के जरिये मिट्टी की सेहत को बेहतर बनाना है।
कृषि सचिव अतिश चंद्रा ने योजना के जिला-केंद्रित दृष्टिकोण को रेखांकित किया। इसके तहत जिले अपनी मिट्टी की स्थिति, वर्षा, फसल पद्धतियों, जल उपलब्धता, बुनियादी ढांचे और किसानों की जरूरतों के आधार पर कार्ययोजनाएं तैयार करते हैं। उन्होंने योजना के क्रियान्वयन और समन्वय में जिला धन-धान्य समितियों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया।
केंद्रीय बजट 2025-26 में घोषित पीएम-डीडीकेवाई की औपचारिक शुरुआत 11 अक्टूबर, 2025 को की गई थी। इसके तहत 100 जिलों को शामिल किया गया है।
इस योजना का उद्देश्य कृषि उत्पादकता बढ़ाना, फसल विविधीकरण और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने को प्रोत्साहित करना, पंचायत और प्रखंड स्तर पर फसल कटाई के बाद भंडारण क्षमता बढ़ाना, सिंचाई सुविधाओं में सुधार करना तथा अल्पकालिक और दीर्घकालिक कृषि ऋण की उपलब्धता आसान बनाना है।
भाषा राजेश राजेश अजय
अजय