नयी दिल्ली, 12 अक्टूबर (भाषा) दिल्ली में पिछले कुछ दिनों से कड़ी सुरक्षा के बीच जंतर-मंतर पर पसरे सन्नाटे से जूझ रहे दुकानदारों को अब ग्राहकों की आमद लंबे समय तक घटने और नुकसान बढ़ने की आशंका सता रही है, क्योंकि अब यहां विरोध प्रदर्शन नहीं होंगे।
दिल्ली पुलिस ने सोमवार को जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शनों के लिए निर्धारित स्थल की सूची से हटा दिया और इसके बजाय रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान तथा पूर्वी दिल्ली के सीबीडी मैदान को वैकल्पिक स्थल घोषित किया।
सड़क के इस हिस्से में कारोबार करने वाले छोटे दुकानदारों को आशंका है कि इससे उनके ग्राहकों की संख्या घट सकती है।
इनमें खास तौर पर वे प्रदर्शनकारी शामिल हैं, जो नियमित रूप से यहां जुटते थे। अवरोधक लगाए जाने, पुलिसकर्मियों की बढ़ी हुई मौजूदगी और प्रदर्शन स्थल के पास कई दुकानों के बंद रहने के बीच दुकानदारों ने कहा कि प्रदर्शनकारियों की गैरमौजूदगी और दफ्तर जाने वालों की कम आवाजाही का असर उनकी कमाई पर पहले ही पड़ने लगा है।
प्रदर्शन स्थल के पास पिछले 20 साल से अधिक समय से छोले-भटूरे, राजमा-चावल, मटर-कुलचा और पुलाव की छोटी दुकान लगा रहे विजय गुप्ता ने कहा कि उन्हें एक महीने में 40 प्रतिशत तक नुकसान होने की आशंका है।
गुप्ता ने कहा, ‘‘मैं यहां 20 साल से अधिक समय से हूं और कई विरोध प्रदर्शन देखे हैं। उनसे अच्छा-खासा कारोबार होता था। इससे पहले हमें इतने बड़े पैमाने पर कभी नुकसान नहीं हुआ। इस बार प्रदर्शनकारियों को आने की अनुमति नहीं दी जा रही है और दफ्तर जाने वाले लोग भी नहीं आ रहे हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘जब भी कोई विरोध प्रदर्शन होता है, तो हमारे जैसी छोटी दुकानों का कारोबार बढ़ जाता है। जंतर-मंतर के निर्धारित विरोध स्थल होने के कारण प्रदर्शनों के दौरान यहां लोगों की लगातार आवाजाही बनी रहती थी। अब इसे इस सूची से हटा दिए जाने के बाद लोगों की आवाजाही घटने की आशंका है, जिसका असर निश्चित रूप से हमारी कमाई पर पड़ेगा।’’
गुप्ता ने कहा कि उनके अनुभव में पहली बार ऐसा हुआ है कि जारी विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शन स्थल के ठीक बाहर की खाद्य दुकानें बंद रही हैं।
इस इलाके में 26 साल से पान की दुकान लगा रहे अजय कुमार ने आर्थिक अनिश्चितता पर चिंता जताई।
उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि इस कदम का विरोध प्रदर्शनों के जरिये उठाई जाने वाली आवाजों पर क्या असर पड़ेगा।
कुमार ने कहा, ‘‘एक दुकानदार के तौर पर मुझे लगता है कि जंतर-मंतर को निर्धारित विरोध स्थल की सूची से हटाए जाने के बाद कम से कम सड़कें और मेट्रो स्टेशन खोल दिए जाने चाहिए, ताकि लोग अपने दफ्तर जा सकें। इस विरोध प्रदर्शन के कारण भारी नुकसान हुआ है, क्योंकि आसपास मुश्किल से ही कोई नजर आता है। यह सड़क तो आमतौर पर काफी व्यस्त रहती है।’’
इसी इलाके में पान की एक अन्य दुकान लगाने वाले राजीव ने कहा कि इस अनिश्चितता का असर उनकी रोजाना की कमाई पर बहुत ज्यादा है।
उन्होंने कहा, ‘‘सच कहूं तो हम सभी के लिए यह बहुत असमंजस का समय है। मेरे पिता पहले यह दुकान चलाते थे, लेकिन अब उनकी तबीयत इतनी खराब रहती है कि वे काम नहीं कर सकते। इस दुकान से हमारे परिवार का खर्च चलता है और मेरी बहन की पढ़ाई का खर्च भी निकलता है।’’
राजीव ने कहा, ‘‘हमें बैठकर यह आकलन करना होगा कि कितना नुकसान होने की आशंका है। इसके बाद ही हम उसी हिसाब से आर्थिक फैसले ले पाएंगे।’’
भाषा जितेंद्र नरेश
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