पेशावर, 12 अक्टूबर (भाषा) पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में आपातकाल और राज्यपाल शासन लागू किए जाने के एक दिन बाद सोमवार को पेशावर उच्च न्यायालय में संबंधित फैसले को चुनौती देने वाली याचिका दायर की गई।
अधिवक्ता सलमान की ओर से दायर की गई इस याचिका में राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और खैबर पख्तूनख्वा के राज्यपाल फैसल करीम कुंडी को प्रतिवादी बनाया गया है।
याचिकाकर्ता ने दलील दी कि प्रांत में आपातकाल और राज्यपाल शासन लागू किया जाना 'अवैध, असंवैधानिक और दुर्भावनापूर्ण इरादों से प्रेरित' है।
याचिका में कहा गया है कि ये उपाय मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करने के साथ ही लोकतांत्रिक जनादेश को दरकिनार करता है।
राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में बढ़ते आतंकवादी हमलों, संवैधानिक व्यवस्था के ठप पड़ने और कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति का हवाला देते हुए वहां पाकिस्तानी संविधान के अनुच्छेद 232(1) और 234(1) के तहत आपातकाल लागू करने की रविवार को घोषणा की।
विपक्ष के कई नेताओं ने भी खैबर पख्तूनख्वा में राज्यपाल शासन और आपातकाल लागू किए जाने के फैसले के खिलाफ अदालत का रुख करने का निर्णय लिया है।
सोमवार को इस्लामाबाद में हुई एक बैठक में पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के अध्यक्ष बैरिस्टर गौहर अली खान, नेशनल असेंबली में विपक्ष के नेता महमूद खान अचकजई और महासचिव बैरिस्टर सलमान अकरम राजा शामिल हुए।
उन्होंने प्रांत में राज्यपाल शासन और आपातकाल लागू किए जाने तथा उसके बाद उपजी स्थिति पर चर्चा की।
इस बीच, पुलिस ने खैबर पख्तूनख्वा के पूर्व मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी और पीटीआई के सात अन्य नेताओं को एहतियातन हिरासत में ले लिया है।
आपातकाल तब लगाया गया, जब अफरीदी के नेतृत्व में पीटीआई एक विरोध मार्च निकाल रही थी, जिसमें जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई और उनके लिए चिकित्सा उपचार की मांग की जा रही थी।
क्रिकेटर से नेता बने 73 वर्षीय इमरान 2023 से रावलपिंडी की अदियाला जेल में बंद हैं। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार और हिंसा भड़काने जैसे 100 से ज्यादा मामले लंबित हैं।
भाषा पारुल संतोष
संतोष