नयी दिल्ली, 12 अक्टूबर (भाषा) विमान इंजन विनिर्माता जीई एयरोस्पेस की योजना भारत में अपनी आपूर्ति शृंखला पर होने वाले खर्च को 2030 तक लगभग दोगुना करके 40 करोड़ डॉलर करने की है। कंपनी देश से कलपुर्जों की खरीद बढ़ाने पर जोर दे रही है।
कंपनी पिछले 40 से अधिक वर्षों से भारत में मौजूद है और नागर विमानन तथा रक्षा क्षेत्रों में उसकी मजबूत उपस्थिति है। इसके अलावा पुणे में उसका एक विनिर्माण संयंत्र और बेंगलुरु में एक प्रौद्योगिकी केंद्र भी है।
वर्ष 2025 में भारत में आपूर्ति शृंखला पर जीई एयरोस्पेस का खर्च 20 करोड़ डॉलर रहा था।
जीई एयरोस्पेस के दक्षिण एशिया के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) विक्रम राय ने सोमवार को कहा कि भारत में आपूर्ति शृंखला पर खर्च 2030 तक लगभग दोगुना हो जाएगा, जो देश के बढ़ते विमानन परिवेश के प्रति कंपनी की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
सोमवार को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में जीई एयरोस्पेस के पास 17 वैश्विक आपूर्तिकर्ता हैं, जिनमें टाटा समूह, महिंद्रा, एचएएल और गोदरेज शामिल हैं। इसके अलावा 2,000 से अधिक स्थानीय आपूर्तिकर्ता भी कंपनी से जुड़े हैं।
इस समय देश में जीई एयरोस्पेस के 1,400 से अधिक वाणिज्यिक इंजन और 200 से अधिक रक्षा इंजन परिचालन में हैं।
भाषा अजय पाण्डेय
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