होशियारपुर, 12 अक्टूबर (भाषा) पंजाब के होशियारपुर जिले में रविवार को बारिश और तेज हवाओं से खेतों में धान, आलू, गन्ना, सब्जियों सहित कई फसलें क्षतिग्रस्त हो गईं। किसान नेताओं ने ओलावृष्टि से प्रभावित क्षेत्रों में भारी नुकसान का दावा करते हुए राज्य सरकार से मुआवजे की मांग की है।
अधिकारियों ने बताया कि राजस्व विभाग फसलों को हुए नुकसान का आकलन करेगा। बारिश को देखते हुए जिला प्रशासन ने खरीद मंडियों में रखे धान को सुरक्षित रखने के इंतजाम भी किए हैं।
किसान नेताओं के अनुसार, 11 अक्टूबर को बारिश और तेज हवाओं के कारण कई इलाकों में धान की फसल खेतों में गिर गई। कुछ दिन पहले ओलावृष्टि से बोदल, बेरछा और गरना साहिब सहित कई गांवों में फसलों को नुकसान पहुंचा था। कुछ क्षेत्रों में जलभराव से आलू की फसल भी प्रभावित हुई है।
दोआबा किसान समिति के प्रदेश अध्यक्ष जंगवीर सिंह चौहान ने कहा कि ओलावृष्टि से प्रभावित खेतों में धान के दाने झड़ गए हैं और कुछ जगहों पर करीब 40 प्रतिशत नुकसान हुआ है। उन्होंने बोदल, बेरछा, गढ़दीवाला, लालोवाल और हुसैनपुर को प्रभावित इलाकों में गिनाते हुए किसानों को पूरा मुआवजा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि बारिश से गन्ने, चारे और सब्जियों को भी नुकसान पहुंचा है।
भारतीय किसान यूनियन (दोआबा) के प्रदेश अध्यक्ष मनजीत सिंह राय ने कहा कि बारिश से मंडियों में रखा धान भी प्रभावित हुआ है। तिरपाल से ढकने के बावजूद कुछ जगहों पर बारिश का पानी रखे गए धान के ढेर तक पहुंच गया।
किसान नेता ने ओलावृष्टि से नष्ट धान और मंडियों में बारिश से खराब हुई फसल के लिए 50,000 रुपये प्रति एकड़ मुआवजे की मांग की है।
होशियारपुर के मुख्य कृषि अधिकारी दीपिंदर सिंह संधू ने कहा कि खेतों में गिरी धान की फसल से पैदावार घट सकती है और कटाई में भी परेशानी हो सकती है। उन्होंने बताया कि बारिश के बाद मिट्टी से बाहर निकले आलू भी क्षतिग्रस्त हो सकते हैं।
उपायुक्त आशिका जैन ने बताया कि मंडियों में धान को तिरपाल से ढकने और बारिश का पानी निकालने के निर्देश दिए गए हैं।
अधिकारियों को मंडियों का दौरा कर व्यवस्था की निगरानी करने और खरीद सुचारु रखने को कहा गया है।
भाषा संतोष
संतोष
संतोष