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केरलम विधानसभा ने निजी विश्वविद्यालय विधेयक राष्ट्रपति के पास से वापस लेने का प्रस्ताव पारित किया

तिरूवनंतपुरम, 12 अक्टूबर (भाषा) केरलम विधानसभा ने सोमवार को एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र से केरल निजी विश्वविद्यालय विधेयक वापस भेजने का अनुरोध किया, जो अभी राष्ट्रपति के पास विचारार्थ है।

सरकार का कहना है कि राज्य विधानसभा के इतिहास में अपनी तरह का यह संभवत: पहला मामला है।

उच्च शिक्षा मंत्री रोजी एम. जॉन ने केरल निजी विश्वविद्यालय (स्थापना और विनियमन) विधेयक, 2025 को वापस लाने का प्रस्ताव पेश किया, जिसे पूर्ववर्ती वामपंथी सरकार के दौरान पारित किया गया था।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अब इस कानून को इसके मौजूदा स्वरूप में आगे नहीं बढ़ाना चाहती है।

राज्य में निजी विश्वविद्यालयों को स्थापित करने, उन्हें मान्यता देने और उनके नियमन के मकसद से सदन में पेश किया गया यह विधेयक 25 मार्च 2025 को विधानसभा में पारित हुआ था और इसे 21 अप्रैल 2025 को मंजूरी के लिए राज्यपाल के पास भेजा गया था।

प्रस्ताव में कहा गया है कि इसके बाद राज्यपाल ने संविधान के अनुच्छेद 200 के तहत राष्ट्रपति के विचारार्थ विधेयक को सुरक्षित रख लिया था।

मंत्री ने बताया कि गृह मंत्रालय ने विधेयक के कुछ प्रावधानों, खासकर जमीन के अनिवार्य मालिकाना हक, कब्जे के अधिकार, जरूरी सुरक्षा और सावधि जमा जुड़े प्रावधानों पर राज्य सरकार से स्पष्टीकरण मांगा था।

उन्होंने बताया कि राज्य मंत्रिमंडल ने 16 सितंबर 2026 को हुई अपनी बैठक में विधानसभा में विधेयक की वापसी के लिए प्रस्ताव लाने का फैसला किया था।

जॉन ने कहा कि सरकार विधानसभा की कार्य-प्रक्रिया नियमावली के तहत विधेयक की वापसी की कोशिश कर रही है, क्योंकि यह राष्ट्रपति के पास विचारार्थ है और इसे सदन को वापस नहीं भेजा गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘शायद केरल विधानसभा के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है’’, और यह विधेयक लगभग डेढ़ साल से अधर में लटका हुआ है।

उन्होंने कहा कि दूसरे राज्यों में निजी और विदेशी विश्वविद्यालय स्थापित किये जा रहे हैं और उनका संचालन हो रहा है, जबकि कानून को लेकर अनिश्चितता के कारण सरकार केरलम में ऐसी ही पहल को आगे नहीं बढ़ा पाई है।

हालांकि, विपक्ष के नेता पिनराई विजयन ने इस कदम की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाया। उन्होंने तर्क दिया कि जब तक विधेयक राष्ट्रपति के पास विचारार्थ है, विधानसभा कोई वैकल्पिक प्रक्रिया नहीं अपना सकती।

संविधान के अनुच्छेद 201 का जिक्र करते हुए विजयन ने कहा कि राष्ट्रपति किसी विधेयक को मंजूरी दे सकते हैं, मंजूरी रोक सकते हैं या उसपर फिर से विचार करने के लिए उसे विधानसभा को लौटा सकते हैं।

भाषा सुभाष मनीषा

मनीषा