मुंबई, 12 अक्टूबर (भाषा) कार्यस्थल पर मानसिक स्वास्थ्य को लेकर बढ़ती जागरूकता के बीच 61 प्रतिशत नौकरी तलाशने वाले लोग मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के कारण छुट्टी लेने की बात अपने नियोक्ता को बताने के लिए तैयार हैं। नौकरी पोर्टल नौकरी डॉट कॉम की सोमवार को जारी एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।
देश के आठ शहरों और 83 उद्योगों में नौकरी तलाश रहे 10,000 लोगों से मिली प्रतिक्रिया पर आधारित इस रिपोर्ट के अनुसार, 42 प्रतिशत लोगों ने कहा कि काम और निजी जीवन के बीच संतुलन नहीं बन पाना उनके मानसिक स्वास्थ्य पर सबसे ज्यादा असर डालता है। वहीं, 27 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्हें अपने प्रबंधकों से पर्याप्त सहयोग नहीं मिलता, जबकि 20 प्रतिशत ने काम का अधिक बोझ और तय समय में काम पूरा करने के दबाव को इसकी वजह बताया।
रिपोर्ट के अनुसार, कार्यस्थल का माहौल और प्रबंधकों का व्यवहार कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य पर असर डालता है।
रिपोर्ट में शामिल 33 प्रतिशत लोगों ने चिंता जताई कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के बारे में अपने नियोक्ता को बताने से उनके करियर में आगे बढ़ने के अवसर कम हो सकते हैं। वहीं, 32 प्रतिशत लोगों को डर है कि उनकी परेशानी को कोई गंभीरता से नहीं लेगा।
इसके अलावा, 19 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्हें कमजोर समझे जाने का डर है, जबकि 16 प्रतिशत को चिंता है कि उनकी समस्या कार्यालय में चर्चा का विषय बन सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार, कंपनियां कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य का बेहतर ध्यान कैसे रख सकती हैं, इस सवाल पर 53 प्रतिशत लोगों ने कहा कि काम के समय और निजी जीवन के समय के बीच स्पष्ट अंतर होना चाहिए।
वहीं, 22 प्रतिशत लोगों ने कहा कि प्रबंधकों को मानसिक थकान के संकेत पहचानने की जानकारी दी जानी चाहिए। इसके अलावा, 13 प्रतिशत लोगों ने मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के लिए अलग से छुट्टी देने और 12 प्रतिशत ने परामर्श सेवाएं उपलब्ध कराने की जरूरत बताई।
भाषा योगेश अजय
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