इंदौर, 12 अक्टूबर (भाषा) भारतीय तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह ने कहा कि वेस्टइंडीज के कप्तान शाई होप को रोकने के लिए टीम ने खास रणनीति बनाई थी और गेंदबाजों ने मैदान पर उस पर अच्छी तरह अमल किया।
भारत ने पांच मैचों की शृंखला के तीसरे टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच में वेस्टइंडीज को 14 रन से हराकर 2-1 की बढ़त बना ली।
अर्शदीप ने रविवार को खेले गए मुकाबले में चार ओवर में 44 रन देकर तीन विकेट लिए। उन्होंने खतरनाक बल्लेबाज शाई होप (5) और शेरफेन रदरफोर्ड (32) को बोल्ड करके भारत को अहम सफलता दिलाई। भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 223 रन बनाए और फिर वेस्टइंडीज को लक्ष्य तक पहुंचने से रोक दिया।
यह जीत भारत के लिए खास रही, क्योंकि रांची में खेले गये दूसरे टी20 मैच में होप के शतक और रदरफोर्ड की 37 गेंदों में 84 रन की तूफानी पारी की बदौलत वेस्टइंडीज ने 250 रन का लक्ष्य हासिल कर रिकॉर्ड जीत दर्ज की थी।
भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) की ओर से जारी वीडियो में अर्शदीप ने कहा ‘‘ मैच से पहले हमने शाई होप को रोकने की रणनीति बनाई थी। हमारा लक्ष्य उन पर दबाव बनाए रखना और योजना को मैदान पर सही तरीके से लागू करना था। जब इसका नतीजा मिलता है, तो बहुत अच्छा लगता है।’’
उन्होंने इस सफलता का श्रेय कोच और पूरी गेंदबाजी इकाई को देते हुए कहा, “कोचिंग दल ने हमें रणनीति समझाई और बताया कि मैच में किन बातों पर अमल करना है। सभी गेंदबाजों ने इसे अच्छी तरह लागू किया। मयंक यादव ने दूसरे छोर से लगातार दबाव बनाए रखा और सभी छह गेंदबाजों ने योगदान दिया। दबाव में अपनी योजना को सही तरीके से लागू करना अच्छा लगता है और इसमें मजा भी आता है।’’
मयंक को कोई सफलता नहीं मिली लेकिन उन्होंने अपनी तेज गेंदबाजी से वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों को परेशान किया और चार ओवर में सिर्फ 34 रन खर्च किये।
अर्शदीप ने टीम के ड्रेसिंग रूम के खुशनुमा माहौल की भी तारीफ करते हुए कहा कि युवा खिलाड़ियों को सीनियर खिलाड़ियों से सीखने के भरपूर मौके मिलते हैं।
उन्होंने कहा, “ड्रेसिंग रूम का माहौल काफी सहज और खुशनुमा है। ऐसा नहीं है कि ज्यादा मैच खेलने वाले खिलाड़ी को अधिक और कम मैच खेलने वाले को कम महत्व दिया जाता है। यहां सभी के लिए अच्छा माहौल है।”
अर्शदीप ने कहा कि वह हर उस गेंदबाज से कुछ न कुछ सीखने की कोशिश करते हैं, जिसकी गेंदबाजी का अंदाज उनसे अलग है। उन्होंने कहा, “मैं हमेशा सीखने और अपने खेल में सुधार करने के लिए तैयार रहता हूं। जब तक सीखने की भूख बनी रहेगी, मैं अपने खेल को बेहतर बनाने की कोशिश करता रहूंगा।”
भाषा
आनन्द पंत
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