तिरुवनंतपुरम, 12 अक्टूबर (भाषा) केरलम विधानसभा ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर जारी विवाद के बीच मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग करते हुए सोमवार को एक प्रस्ताव पारित किया।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी सीईसी के खिलाफ आक्रामक आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री वी डी सतीशन की ओर से पेश किया गया यह प्रस्ताव देश में इस संबंध में संभवत: पहला प्रस्ताव है।
सतीशन ने बाद में सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, 'मतदान का अधिकार हमारे लोकतंत्र की नींव है। किसी भी संस्था को हमारे नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों को कमजोर करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। हमारा रुख बिल्कुल स्पष्ट है। मतदान के अधिकार की रक्षा होनी चाहिए। संविधान का पालन होना चाहिए। लोकतंत्र की जीत होनी चाहिए। केरलम स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के पक्ष में मजबूती से खड़ा है।'
उन्होंने कहा, 'केरलम ने इतिहास रच दिया है। पहली बार केरलम विधानसभा ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पद से हटाने की मांग वाला प्रस्ताव पारित किया है। हमारी चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।'
इससे पहले, प्रस्ताव पेश करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने की शिकायतें मिली हैं और यह लोकतांत्रिक मूल्यों का स्पष्ट उल्लंघन है।
प्रस्ताव में कहा गया है कि मतदाता सूची में संशोधन, पात्र मतदाताओं को मतदान के अधिकार से वंचित किए जाने और निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता को लेकर गंभीर चिंताएं हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
प्रस्ताव में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं को दूर करने और गलत तरीके से मतदाता सूची से बाहर किए गए सभी पात्र मतदाताओं के मतदान के अधिकार तुरंत बहाल करने की मांग की गई।
इसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू करने की मांग भी की गई। प्रस्ताव में कहा गया है कि एसआईआर को लेकर लगे गंभीर आरोपों के कारण उनकी निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठे हैं।
इसके अलावा, प्रस्ताव में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए गठित चयन समिति के नए सिरे से गठन करने की मांग की गई जिसमें लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और भारत के प्रधान न्यायाधीश को शामिल करने की बात कही गई ताकि 'संस्था की स्वतंत्रता व विश्वसनीयता सुनिश्चित की जा सके।'
प्रस्ताव पेश किए जाने के बाद भाजपा विधायक दल के नेता बी. बी. गोपकुमार ने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि क्या उनका चुनाव कानूनी था।
उन्होंने प्रस्ताव में संशोधन का सुझाव देते हुए कहा कि 2026 की राज्य विधानसभा को भंग कर दिया जाना चाहिए।
कझाकूटम से भाजपा विधायक वी मुरलीधरन ने संशोधन का सुझाव देते हुए कहा कि एसआईआर का दो चुनाव आयुक्तों की ओर से विरोध किए जाने संबंधी खबरों को बाद में निर्वाचन आयोग ने 'गलत' बताया था।
सतीशन ने भाजपा के दोनों नेताओं और एलडीएफ के दो विधायकों द्वारा सुझाए गए संशोधनों को खारिज कर दिया।
उन्होंने कहा कि ये संशोधन प्रस्ताव की मूल भावना के विपरीत हैं और राजनीतिक उद्देश्यों से किए गए हैं।
हालांकि, उन्होंने राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष पिनराई विजयन के मौखिक सुझाव को स्वीकार कर लिया। विजयन ने प्रस्ताव में 'लाखों मतदाताओं' की जगह 'करोड़ों मतदाताओं' शब्द इस्तेमाल करने का सुझाव दिया क्योंकि कथित तौर पर करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए थे।
भाषा जोहेब नरेश
नरेश