(फाइल फोटो के साथ)
नयी दिल्ली, 12 अक्टूबर (भाषा) वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को कहा कि यूरोप के नियमों के कारण वहां वाहनों का विनिर्माण प्रतिस्पर्धी नहीं रह जाएगा और ऐसे में यूरोप की सभी कार कंपनियां भारत में विनिर्माण करना पसंद करेंगी।
गोयल ने कहा कि भारत वैश्विक कार विनिर्माण केंद्र बनने जा रहा है।
यहां ‘दिल्ली डायलॉग’ कार्यक्रम में उन्होंने कहा, ‘‘आखिरकार भारत कार विनिर्माण का वैश्विक केंद्र बनने जा रहा है। सभी कंपनियां भारत आएंगी और यहां विनिर्माण करेंगी। यूरोप में इतने अव्यावहारिक नियम हैं कि वहां प्रतिस्पर्धी बने रहना असंभव हो जाएगा। सभी यूरोपीय विनिर्माता भारत आएंगे।’’
भारत ने मुक्त व्यापार समझौतों के तहत ब्रिटेन और यूरोपीय संघ (ईयू) को कोटा आधारित शुल्क रियायतें दी हैं।
ब्रिटेन के साथ समझौता 15 जुलाई से लागू हो गया था, जबकि यूरोपीय संघ के साथ समझौते पर इस साल के अंत तक हस्ताक्षर होने की संभावना है।
गोयल ने कहा, ‘‘मुझे नहीं पता कि आप इस बारे में जानते हैं या नहीं। टाटा को जगुआर खरीदने के बाद काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। टाटा मोटर्स खुद भी बंद होने की कगार पर पहुंच गई थी। इसके बाद कंपनी ने बड़े पैमाने पर इंजीनियरिंग में बदलाव किए और कुछ मॉडल भारत में बनाने शुरू किए... कई साल बाद आखिरकार वह मुनाफा कमाने में सफल हुई।’’
मंत्री ने यूरोपीय संघ के किसी नियम का विस्तार से उल्लेख नहीं किया। हालांकि, भारत और कुछ अन्य देशों ने ईयू की कार्बन सीमा समायोजन व्यवस्था (सीबीएएम) को लेकर चिंता जताई है।
गोयल ने कहा कि जैसे-जैसे भारतीय बाजार में मांग का स्तर विनिर्माण को व्यावहारिक रूप से संभव बनाने लायक होगा, वैसे-वैसे अंतरराष्ट्रीय वाहन कंपनियां भारत में अधिक विनिर्माण करेंगी।
ब्रिटेन और यूरोपीय संघ (ईयू) से कारों के आयात के लिए तय कोटा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इसके तहत मुख्य रूप से महंगी कारों को शामिल किया गया है, जबकि कम कीमत वाली कार का खंड को अभी नहीं खोला गया है।
मंत्री ने उन लक्जरी कार कंपनियों का उदाहरण दिया, जिन्होंने शुरुआत में भारतीय बाजार की संभावनाएं परखने के बाद पुणे में विनिर्माण संयंत्र स्थापित किए।
उन्होंने कहा कि भारत में वैश्विक वाहन कंपनियों को आकर्षित करने और इस क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करने की काफी संभावनाएं हैं।
गोयल ने भारत की युवा आबादी की ताकत का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे देश को ऐसे समय में अवसर मिलते हैं, जब कई अर्थव्यवस्थाओं में बुजुर्ग आबादी का अनुपात बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि जर्मनी और जापान जैसे देशों में भारतीय कामगारों की मांग है।
भारत के निर्यात के बारे में गोयल ने कहा कि मंत्रालय चालू वित्त वर्ष में वस्तुओं और सेवाओं का कुल एक लाख करोड़ डॉलर का निर्यात हासिल करने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि निर्यात और आयात, दोनों बढ़ रहे हैं। इससे घरेलू उद्योग और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को प्रोत्साहन मिलता है।
चालू वित्त वर्ष 2026-27 में अप्रैल-अगस्त के दौरान निर्यात सालाना आधार पर 17.85 प्रतिशत बढ़कर 215.91 अरब डॉलर हो गया, जबकि आयात 18.21 प्रतिशत बढ़कर 363 अरब डॉलर रहा।
भाषा निहारिका अजय
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