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न्यायालय: जीएम चावल की कथित मंजूरी को लेकर अवमानना याचिका पर तत्काल सुनवाई का अनुरोध

नयी दिल्ली, 12 अक्टूबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय में आनुवंशिक रूप से संशोधित (जीएम) फसलों पर उसके 2024 के फैसले के कथित उल्लंघन को लेकर दायर अवमानना याचिकाओं पर तत्काल सुनवाई करने का सोमवार को आग्रह किया गया।

यह अनुरोध खरपतवारनाशक प्रतिरोधी जीएम बासमती चावल की खेती को कथित मंजूरी दिए जाने को लेकर जताई जा रही चिंताओं के बीच किया गया।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ को वकील प्रशांत भूषण ने बताया कि खरपतवारनाशक प्रतिरोधी जीएम बासमती चावल की खेती को अब मंजूरी दे दी गई है, इसलिए अवमानना याचिका पर जल्द से जल्द सुनवाई की जानी चाहिए।

भूषण ने न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति संजय करोल की पीठ द्वारा 2024 में दिए गए फैसले का उल्लेख किया। उस फैसले में एक मुद्दे पर दोनों न्यायाधीशों की अलग-अलग राय थी, जिसके कारण उसे बड़ी पीठ के पास भेज दिया गया था।

उन्होंने कहा कि अवमानना याचिकाएं उस साझा फैसले से जुड़ी हैं और जीएम सरसों के संबंध में बड़ी पीठ को भेजे गए मामले से इनका कोई संबंध नहीं है। जीएम सरसों से जुड़े संदर्भ पर तीन न्यायाधीशों की विशेष पीठ सुनवाई कर रही थी।

भूषण ने कहा, ‘‘अवमानना याचिकाएं उस संदर्भ से संबंधित नहीं हैं। वे अदालत के साझा फैसले से जुड़ी हैं। इन्हें नियमित अवमानना पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जा सकता है।’’

उन्होंने कहा कि 2025 में दायर अवमानना याचिका का पहले उल्लेख किए जाने के बावजूद अब तक उस पर सुनवाई नहीं हुई है।

भूषण के अनुसार, जीएम सरसों से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही विशेष पीठ ने अवमानना याचिकाओं पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया था।

उन्होंने कहा, ‘‘अब उन्होंने आनुवंशिक रूप से संशोधित बासमती चावल की एक ऐसी किस्म को उगाने की मंजूरी दे दी है, जो खरपतवारनाशक प्रतिरोधी है। इससे हमारी बासमती को नुकसान पहुंचेगा। यह दूषित हो जाएगी और भारी तबाही मचेगी।’’ उन्होंने अदालत से मामले को जल्द से जल्द सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का आग्रह किया।

यह अवमानना याचिका कार्यकर्ता अरुणा रोड्रिग्स ने 2025 में अपनी जनहित याचिका (पीआईएल) के तहत दायर की थी।

याचिका में वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने का अनुरोध किया गया है। इसमें आरोप लगाया गया है कि अधिकारियों ने आनुवंशिक रूप से संशोधित और जीन-संपादित फसलों को उगाने और बेचने के संबंध में उच्चतम न्यायालय के आदेशों की जानबूझकर अवहेलना की।

याचिका के अनुसार, केंद्र ने उच्चतम न्यायालय के 23 जुलाई 2024 के फैसले का उल्लंघन किया। उस फैसले में निर्देश दिया गया था कि ऐसी फसलों को मंजूरी से पहले विशेषज्ञों, राज्य सरकारों और अन्य संबंधित पक्षों से परामर्श करके जीएम फसलों पर एक व्यापक राष्ट्रीय नीति तैयार की जाए।

याचिका में आरोप लगाया गया कि खरपतवारनाशक प्रतिरोधी बासमती चावल की किस्मों को ‘रोबीनोवीड’ ब्रांड नाम से मई 2024 में व्यावसायिक रूप से जारी किया गया था। वहीं, ‘कमला’ ब्रांड नाम वाली डीआरआर राइस 100 और पूसा डीएसटी राइस 1 सहित जीन-संपादित चावल की किस्में मई 2025 में जारी की गईं।

भाषा शोभना मनीषा

मनीषा