नयी दिल्ली, 12 अक्टूबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को पुलिस से नागरिक अधिकार कार्यकर्ता मोहम्मद वासिक नदीम खान के उस आरोप पर वस्तुस्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा, जिसमें उन्होंने दावा किया है कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होने से रोकने के लिए उन्हें अवैध रूप से हिरासत में लिया गया था।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव सांबरे और न्यायमूर्ति संजय शर्मा की पीठ ने खान की याचिका पर नोटिस जारी किया। याचिका में पुलिस द्वारा लगातार निगरानी किए जाने और फोन किए जाने का भी आरोप लगाया गया है। पीठ ने पुलिसकर्मियों के आचरण पर दिल्ली पुलिस के वकील से सवाल भी किए।
पीठ ने माना कि पुलिस को प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार करने का अधिकार है, लेकिन सुनवाई के दौरान मौखिक रूप से सवाल किया, ‘‘आप इस व्यक्ति के घर में कैसे घुस सकते हैं? आपको अपना कर्तव्य निभाने का अधिकार है, लेकिन आप ऐसा कैसे कर सकते हैं? उसे रोककर रखने का आपके पास क्या आधार है?’’
याचिकाकर्ता के वकील ने दावा किया कि 29 सितंबर को दो पुलिसकर्मी उनके आवास-सह-कार्यालय पहुंचे और पूरे दिन उसे कहीं आने जाने नहीं दिया।
वकील ने आरोप लगाया कि खान की लगातार निगरानी की गई और अदालत से अनुरोध किया कि इस तरह के आचरण को ‘‘उत्पीड़न और मनमाना व्यवहार’’ घोषित किया जाए।
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने लोगों की स्वतंत्र आवाजाही सुनिश्चित करने के संबंध में हाल ही में निर्देश जारी किए हैं।
वहीं, पुलिस के वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता को किसी भी तरह से हिरासत में नहीं लिया गया था। उन्होंने दलील दी कि खान पिछले सप्ताह कोलकाता भी गए थे। पुलिस के वकील ने अदालत से अपना पक्ष रिकॉर्ड पर रखने के लिए समय मांगा। उन्होंने यह आश्वासन भी दिया कि याचिकाकर्ता को आगे फोन नहीं किए जाएंगे।
अदालत को बताया गया कि याचिकाकर्ता ने पहले 29 सितंबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की अनुमति मांगी थी, जिसे अस्वीकार कर दिया गया था।
पुलिस के वकील ने दलील दी कि कुछ पुलिसकर्मी केवल पूछताछ के लिए उनके पास गए थे, क्योंकि उन्हें सूचना मिली थी कि अनुमति नहीं मिलने के बावजूद वह प्रदर्शन में शामिल होने वाले हैं।
‘एसोसिएशन ऑफ प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स’ (एपीसीआर) के राष्ट्रीय सचिव और ‘यूनाइटेड अगेंस्ट हेट’ पहल के संस्थापक खान ने पिछले सप्ताह उच्च न्यायालय का रुख किया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि 29 सितंबर को सुबह करीब साढ़े नौ बजे से शाम साढ़े पांच बजे तक शाहीन बाग थाने से जुड़े पुलिस अधिकारियों ने उन्हें अबुल फजल एन्क्लेव स्थित जमात-ए-इस्लामी हिंद के मुख्यालय में रोककर रखा, ताकि वह प्रदर्शन में शामिल न हो सकें।
एपीसीआर, इंडियन मुस्लिम्स की निगरानी समिति और अन्य नागरिक समाज संगठनों ने पूजा स्थलों पर बार-बार कथित हमलों के विरोध में 29 सितंबर को जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन का आह्वान किया था।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि उन्हें न तो औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया और न ही उन्हें हिरासत में रखने के कारण लिखित रूप में बताए गए। उन्होंने यह भी दावा किया कि गिरफ्तारी मेमो तैयार नहीं किया गया, किसी रिश्तेदार को सूचित नहीं किया गया और उन्हें मजिस्ट्रेट के सामने पेश नहीं किया गया।
खान ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिसकर्मी दो अक्टूबर और पांच अक्टूबर के प्रदर्शनों के सिलसिले में उनके ठिकाने के बारे में लगातार उनसे संपर्क करते रहे। इससे उन्हें आशंका हुई कि उनकी आवाजाही पर आगे भी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
भाषा शोभना सुरेश
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