भोपाल, 11 अक्टूबर (भाषा) मुख्यमंत्री मोहन यादव ने असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से लाए गए आठ जंगली भैंसों को रविवार को मध्यप्रदेश के कान्हा बाघ अभयारण्य के 17 हेक्टेयर के बाड़े में छोड़ दिया। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।
मुख्यमंत्री ने इस मौके पर कहा कि छह मादा और दो नर को उनकी पृथक-वास अवधि पूरी करने के बाद सुपखार रेंज में एक हेक्टेयर के बाड़े से स्थानांतरित कर दिया गया।
इन भैंसों को 28 अप्रैल और 9 मई को दो चरणों में कान्हा लाया गया था। उन्हें स्थानीय जलवायु और पर्यावरण के अनुकूल ढलने में मदद करने के लिए छोटे बाड़े में रखा गया था।
उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश में ये जंगली भैंसे विलुप्त हो चुके हैं और उनके प्राकृतिक आवास में पुनः स्थापित करने की दिशा में रविवार को यह महत्वपूर्ण कदम उठाया गया।
अधिकारियों के मुताबिक इस पहल का उद्देश्य जंगली भैंसों को क्षेत्र की आबोहवा और पर्यावरण के अनुकूल बनाकर उनके प्राकृतिक आवास में पुनर्स्थापित करना है।
मुख्यमंत्री यादव ने इस अवसर पर कहा कि लगभग सौ वर्षों बाद कान्हा बाघ अभयारण्य के सुपखार रेंज में जंगली भैंसों की पुनर्स्थापना का दूसरा चरण प्रारंभ हो रहा है।
उन्होंने कहा कि असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा के सहयोग से काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से लगभग 2200 किलोमीटर की दूरी तय कर आठ जंगली भैंसों को मध्यप्रदेश लाया गया है।
उन्होंने कहा कि वर्षाकाल समाप्त होने के बाद इन्हें प्राकृतिक आवास में बसाने की दिशा में आगे बढ़ाया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना के अंतर्गत आगामी तीन वर्षों में कुल 50 जंगली भैंसों को पुनः स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह पहल मध्यप्रदेश में जैव-विविधता के संरक्षण, वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को मजबूत बनाने और विलुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।’’
यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार विलुप्त हो चुके वन्यजीवों को पुनः स्थापित कर पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाने की दिशा में कार्य कर रही है।
उन्होंने बताया कि सात अक्टूबर को नौरादेही में रानी दुर्गावती के नाम पर अभयारण्य बनाकर चीतों के लिए तीसरा ठिकाना विकसित करने की पहल की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश से नक्सलवाद के खात्मे के बाद इस क्षेत्र में विकास की नई संभावनाएं सामने आ रही हैं।
भाषा ब्रजेन्द्र शफीक
शफीक