नयी दिल्ली, 11 अक्टूबर (भाषा) विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने सऊदी अरब की राजधानी रियाद स्थित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए हमलों को लेकर कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाद्रा की ‘चुप्पी’ पर सवाल उठाए और पूछा कि क्या वह हिंसा की निंदा कर पीड़ितों के प्रति एकजुटता व्यक्त करेंगी, ठीक उसी तरह जैसे उन्होंने गाजा के समर्थन में अपनी आवाज उठाई थी।
रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर शनिवार को हुए हमले में 12 लोगों की मौत हो गई और 300 से अधिक लोग घायल हो गए।
सऊदी अधिकारियों के बयान के मुताबिक मृतकों में चार सऊदी नागरिक, दो बांग्लादेशी और फलस्तीन, अमेरिका, मिस्र, जॉर्डन, सीरिया तथा सूडान के एक-एक नागरिक शामिल हैं।
पड़ोसी देश यमन में सक्रिय ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सप्ताह की शुरुआत में किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर किए गए हमलों की जिम्मेदारी ली थी। उन हमलों में एक पायलट समेत सऊदी अरब के तीन नागरिकों की मौत हुई थी।
विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में फलस्तीनी लोगों के समर्थन में आवाज उठाने वाले कांग्रेस नेताओं और मुस्लिम संगठनों की ‘चुप्पी’ पर सवाल उठाये।
संसद में ‘फलस्तीन’ लिखा बैग लेकर पहुंचने वाली प्रियंका गांधी और शपथ ग्रहण के अंत में ‘जय फलस्तीन’ का नारा लगाने वाले एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी का उल्लेख करते हुए बंसल ने पूछा कि क्या वे सऊदी अरब के लोगों के प्रति भी एकजुटता व्यक्त करेंगे।
बंसल ने सवाल किया, “क्या आप रियाद हवाई अड्डे पर हूतियों के हमलों की स्पष्ट और बिना किसी शर्त के निंदा करेंगे? निर्दोष नागरिकों की हत्या के खिलाफ आपकी आवाज उतनी ही बुलंद होगी, जितनी गाजा के मामले में थी? क्या आप हूतियों की हिंसक कार्रवाइयों का खुलकर विरोध करेंगे?”
उन्होंने यह भी सवाल किया कि ‘जय फलस्तीन’ का नारा लगाने वाले लोग क्या अब सऊदी अरब के निर्दोष नागरिकों के प्रति एकजुटता जताने के लिए ‘‘जय रियाद’’ कहेंगे।
बंसल ने कहा, “शायद उन्हें यह याद दिलाने की जरूरत है कि मक्का और मदीना भी सऊदी अरब में ही स्थित हैं। यह वही देश है, जिसके निर्दोष लोगों को निशाना बनाया गया है।’’
विहिप के नेता ने कांग्रेस नेताओं के साथ-साथ जमीयत उलेमा-ए-हिंद, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी), दारुल उलूम देवबंद और एआईएमआईएम जैसे संगठनों पर भी निशाना साधा।
बंसल ने पूछा, “क्या आतंकवाद और हिंसा के प्रति आपका विरोध कभी सार्वभौमिक होगा, या आप दोहरे राजनीतिक मापदंड अपनाकर और न्याय तथा मानवता से ऊपर संकीर्ण राजनीतिक हितों को ध्यान में रखकर चरमपंथियों को बचाते रहेंगे?”
उन्होंने कहा कि न्याय और मानवता के पक्ष में खड़े होने का दावा करने वाले लोग निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाए जाने पर चुप नहीं रह सकते।
उन्होंने कहा, “यदि आपमें न्याय और मानवता के लिए आवाज उठाने का साहस है, तो आपकी आवाज चुनिंदा नहीं हो सकती।”
बंसल ने यह आरोप भी लगाया कि ऐसे नेताओं और संगठनों की चुप्पी आतंकवाद का समर्थन करने के समान है।
उन्होंने कहा, “याद रखिये, अतीत की तरह इस बार भी आपकी चुप्पी वैश्विक आतंकवादियों को खुला समर्थन देने से कम नहीं है।”
भाषा देवेंद्र रंजन
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