अंबाजी, 11 अक्टूबर (भाषा) गुजरात के प्रसिद्ध अंबाजी मंदिर के खास ‘मोहनथाल’ प्रसाद को नवरात्रि के पहले दिन भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग मिला। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।
बेसन, चीनी और घी से बनने वाला मोहनथाल बनासकांठा जिले में स्थित प्रसिद्ध दुर्गा मंदिर और प्रमुख शक्तिपीठ अंबाजी में पारंपरिक रूप से चढ़ाया जाने वाला प्रसाद है।
बनासकांठा के जिलाधिकारी एवं श्री आरासुरी अंबाजी माता देवस्थान ट्रस्ट के प्रबंध न्यासी मिहिर पटेल ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘भारत सरकार ने मोहनथाल प्रसाद को जीआई टैग प्रदान किया है। इसे अंबाजी मंदिर का विशिष्ट प्रसाद माना जाता है। श्री आरासुरी अंबाजी माता देवस्थान ट्रस्ट की ओर से मैं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और सरकार का आभार व्यक्त करता हूं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘अंबाजी मंदिर का प्रसाद देवी के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था और वर्षों पुरानी धार्मिक परंपरा का प्रतीक है। यह जीआई टैग देवी के सभी भक्तों के लिए गर्व की बात है।’’
अंबाजी शहर में रविवार को आयोजित एक समारोह में मंदिर ट्रस्ट को जीआई टैग का आधिकारिक प्रमाणपत्र सौंपा गया।
जीआई टैग बौद्धिक संपदा के तहत किसी ऐसे उत्पाद को दी जाने वाली मान्यता है, जिसकी गुणवत्ता, प्रतिष्ठा या अन्य विशेषताएं किसी खास भौगोलिक क्षेत्र से जुड़ी हों। यह मान्यता दर्शाती है कि कोई उत्पाद किसी विशिष्ट स्थान से संबंधित है और अपनी विशिष्ट गुणवत्ता या प्रतिष्ठा के लिए जाना जाता है।
पेटेंट, डिजाइन एवं व्यापार चिह्न महानियंत्रक तथा भौगोलिक संकेतक के रजिस्ट्रार उन्नत पंडित ने समारोह में संवाददाताओं से कहा, ‘‘शारदीय नवरात्र शुरू हो गए हैं और देवी के सभी भक्तों के लिए भक्ति एवं परंपरा से गहराई से जुड़े माताजी के प्रसाद को प्राप्त करना गर्व की बात है।’’
उन्होंने कहा कि मोहनथाल की परंपरा सदियों पुरानी है और दुनियाभर के श्रद्धालुओं का इस मिठाई तथा इससे जुड़ी आस्था के साथ गहरा संबंध है।
भाषा रवि कांत दिलीप
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