नयी दिल्ली, 11 अक्टूबर (भाषा) भारतीय जनता पार्टी ने रविवार को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (कॉजपा) पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ महीने पहले अस्तित्व में आए इस संगठन ने नीट प्रश्नपत्र लीक के आरोपों और मुख्य रूप से छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन किया था, लेकिन अब उसने ‘‘अचानक’’ चुनावी राजनीति से जुड़े मुद्दे पर अपना ध्यान केंद्रित कर लिया है।
भाजपा के राज्यसभा सदस्य सुधांशु त्रिवेदी ने यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन के दौरान मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए कॉजपा पर तंज कसा, ‘‘शायद रेडियोधर्मी क्षय में भी इतना तेज बदलाव देखने को नहीं मिलता होगा।’’
भाजपा के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने शनिवार को कॉजपा और आम आदमी पार्टी (आप) के बीच साठगांठ का आरोप लगाया था।
कॉजपा के शीर्ष नेताओं ने रविवार को मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान कथित अनियमितताओं के खिलाफ अपने विरोध प्रदर्शन को और तेज करने का संकल्प लिया।
कॉजपा के नेता अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को इस शर्त पर रिहा किया गया था कि वे ‘‘शांति भंग नहीं करेंगे’’। हालांकि, कॉजपा नेताओं ने अपनी हिरासत को अवैध बताते हुए कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक उनका विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।
कॉजपा नेताओं द्वारा प्रदर्शन जारी रखने की घोषणा के बारे में पूछे जाने पर त्रिवेदी ने कहा, ‘‘हर किसी को विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार है, लेकिन उसे कितना समर्थन मिलता है, यह बिल्कुल अलग बात है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘एक और बात स्पष्ट हो गई है। महज दो महीने पहले तक परीक्षा प्रणाली से जुड़ा छात्रों का आंदोलन अचानक चुनावी मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन में बदल गया है।’’
इस पर तंज कसते हुए भाजपा नेता ने कहा, ‘‘शायद रेडियोधर्मी क्षय में भी इतना तेज बदलाव देखने को नहीं मिलता होगा।’’
त्रिवेदी ने कहा कि विभिन्न विश्वविद्यालयों के छात्र संघ चुनावों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की हालिया जीत छात्रों की भावनाओं और जमीनी हकीकत को दर्शाती है।
उन्होंने कहा, ‘‘हमने दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ का चुनाव जीता है। हमने पंजाब विश्वविद्यालय छात्र संघ का चुनाव भी जीता है। युवाओं की भावनाएं जमीनी स्तर पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही हैं।’’
कॉजपा ने इस साल जून-जुलाई में नीट प्रश्नपत्र लीक के मुद्दे पर जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया था। इस आंदोलन के बाद तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा था।
भाषा शफीक सुरेश
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